कानपुर देहात। समूह की 70 महिलाएं मोमबत्ती व दोना-पत्तल बनाने का हुनर सीख रही हैं। प्रशिक्षण पूरा होने पर यह कारोबार करेंगी और आत्मनिर्भर बनकर लखपति दीदी की श्रेणी में शामिल होंगी। प्रशिक्षित महिलाओं को काम शुरू करने के लिए सीसीएल के तहत 1.5 लाख रुपये का ऋण उपलब्ध कराया जाएगा।
ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत जिले में नौ हजार स्वयं सहायता समूह संचालित हैं। इनसे जुड़ी करीब एक लाख से अधिक महिलाएं अपने कौशल के अनुसार प्रशिक्षण प्राप्त कर कारोबार कर रही हैं। साथ ही अन्य महिलाओं को भी रोजगार उपलब्ध करा रही हैं। एनआरएलएम विभाग इस समय अभियान चलाते हुए अंत्योदय व पात्र गृहस्थी कार्ड धारक परिवार की महिलाओं को समूह से जुड़ने के लिए प्रेरित कर रहा है। साथ ही इन्हें इनके कौशल के अनुसार प्रशिक्षण देकर कारोबार शुरू करने में सहायता कर रहा है।
आरसेटी (ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान) के प्रशिक्षक निखिल मिश्रा ने बताया कि महिलाओं की सहूलियत के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके तहत झींझक ब्लॉक के औरंगाबाद में समूह की 35 महिलाओं को मोमबत्ती बनाना सिखाया जा रहा है। वहीं, अकबरपुर ब्लॉक के चैनपुर में 35 महिलाओं को दोना-पत्तल व मिठाई का डिब्बा बनाना सिखाया जा रहा है। आरसेटी निदेशक मंयक कटियार ने बताया कि प्रशिक्षित होने के बाद कारोबार शुरू करने के लिए सीसीएल के तहत मिलने वाले ऋण के अलावा सीएम युवा उद्यम योजना के तहत पांच लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण प्राप्त कर सकती हैं।
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समूह की 70 महिलाओं को ग्राम पंचायत स्तर पर मोमबत्ती व दोना-पत्तल आदि बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण पूरा होने पर कारोबार करने की इच्छा व्यक्त करने पर इन्हें सीसीएल के तहत 1.5 लाख व सीएम युवा उद्यम योजना के तहत पांच लाख रुपये का ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। इसका उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाते हुए लखपति दीदी की श्रेणी में शामिल करना है। - गंगाराम वर्मा, उपायुक्त, एनआरएलएम