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Kanpur News: पुरुषों संग कंधे से कंधा मिलाकर चल रहीं महिलाएं

Tue, 26 Aug 2025 02:06 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
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कानपुर देहात। हर साल 26 अगस्त को महिला समानता दिवस के तौर पर मनाया जाता है। यह दिन महिलाओं को सम्मान, समान अधिकार दिलाने और उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से मनाते है। वर्तमान में कई महिलाएं ऐेसी हैं जो चूल्हे-चौके से इतर क्षेत्र को चुनकर सराहनीय कार्य कर रही हैं। यह पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है। महिला समानता की मिसाल बन रही हैं।
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राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन विभाग के उपायुक्त गंगाराम बताते हैं कि जिले में 9125 महिला समूह हैं। इनसे जुड़ी हुई करीब 95 हजार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए शासन से चलाई जा रही योजनाओं से लाभ प्राप्त किया है। कई महिलाओं ने स्वयं का कारोबार शुरू कर अन्य महिलाओं को जोड़कर आत्मनिर्भर बनाया है।
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जरदोजी व रेशम से लिखी तरक्की की इबारत
कभी राजाओं और राजघरानों के कपड़ों को सजाने के लिए प्रयोग होने वाली जरदोजी व रेशम की कढ़ाई होती थी। प्रशिक्षण में इस हुनर को हासिल कर समूह की 70 महिलाओं के साथ साड़ी, सूट व अन्य कपड़ों पर तरह-तरह की डिजाइन को उकेरने के काम करी हूं। तैयार कपड़ों को जिला मुख्यालय में लगने वाले मेले में बिक्री की जाती है। मेले में आने वाले लोग डिजाइन किए हुए कपड़ों को बहुत पसंद करते हैं और एडवांस में बुकिंग करवाते हैं। स्वयं के साथ समूह से जुड़ी महिलाओं की महीने में 10 से 12 हजार रुपये की आमदनी कर रहीं हैं।
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- आशना खातून, अकोढ़ी, पुखरायां
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भरी सपनों की उड़ान, खुद को किया साबित
घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने की वजह से बीए की पढ़ाई को बीच में छोड़ना पड़ा। इसी दौरान पति के मार्ग दुर्घटना में चुटहिल होने से स्थिति और खराब हो गई। घर की जिम्मेदारी को खुद उठाते हुए स्वयं को साबित किया और प्रशिक्षण लेकर पशु सखी के रूप में काम शुरू किया। अब पंचायत क्षेत्र में 278 परिवारों को सेवा दे रही हूं। पशुओं को टीका लगाने व अन्य सामान्य बीमारियों का इलाज कर अब कर आमदनी कर रही हूं। जब लोग पशु सखी कहकर बुलाते हैं, तो अच्छा लगता है।
- संगीता देवी, करसा, सरवनखेड़ा
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आगे बढ़ने की सोच पर रहीं अडिग, बनीं कारोबारी
मेहनत मजदूरी कर पति परिवार को भरणपोषण करते थे। लेकिन उस कमाई से घर खर्च चलना मुश्किल होता था। आगे बढ़ने की सोच को कभी खत्म नहीं होने दिया और मिठाई के डिब्बे बनाने का छोटा सा काम शुरू किया। शुरूआत में बहुत मुश्किलों को सामना करना पड़ा, लेकिन मेहनत और आगे बढ़ने की जिद रंग लाई और अब बनाए हुए डिब्बे जिले भर में पहुंच रहे हैं। कारोबार को आगे बढ़ाते हुए गांव की 13 महिलाओं को साथ में जोड़कर उन्हें भी आत्मनिर्भर बना रही हूं। - श्यामा, बरौला, अकबरपुर
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गृहणी से बनीं उद्यमी, लोगों को मुहैया कराया रोजगार
गृहणी होने के साथ जीवन में कुछ करने की इच्छा रही। पति का साथ मिला, तो जैनपुर में प्लास्टिक पैकेजिंग मैटेरियल बनाने का काम शुरू किया। उद्यम आगे बढ़ा तो पति ने नौकरी से त्यागपत्र दे दिया। अब दोनों मिलकर काम को आगे बढ़ा रहे हैं। कारखाने में आठ लोगों को रोजगार मुहैया कराकर उन्हें भी आत्मनिर्भर बनाया। साथ ही समाज में महिलाओं के विचारों और उनके जीवन को बेहतर बनाने के प्रयास कर रही हूं। स्वयं सहायता समूह के माध्यम से महिलाओं को पुरुषों के समान अवसर मिलना चाहिए। - मीरा सिंह, उद्यमी, रनियां
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