कानपुर। शहर में महिला खिलाड़ियों के लिए बुनियादी सुविधाओं की कमी चुनौती बनी हुई है। खासकर दूरदराज क्षेत्रों में मैच खेलने जाने पर वहां न तो शौचालय की व्यवस्था होती है और न ही चेंजिंग रूम का कोई प्रबंध होता है।
शहर में कहीं भी मैच होता है तो महिला खिलाड़ियों के लिए काफी हद तक शौचालय या चेंजिंग रूम मिल जाते हैं लेकिन शहर से दूर या अन्य जिलों में होने वाली जिला स्तरीय या राज्यस्तरीय प्रतियोगिताओं में ये समस्याएं अधिक आती हैं। महिला खिलाड़ियों ने बताया कि शौचालय न होने से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि जब भी बाहर मैच होता है तो महिला खिलाड़ियों को अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि हमसे कहा जाता है कि आप खेल से जुड़े हैं तो आपको हर परिस्थति का सामना करना पड़ेगा।
जब हम प्रतियोगिता में जाते हैं तो ये सारी सुविधाएं कई बार नहीं मिलती है। अगर महिलाएं जा रही हैं तो व्यवस्थाएं अधिक अच्छी होनी चाहिए क्योंकि उनके साथ स्वच्छता जरूरी है। -सौम्या ओझा, योगा खिलाड़ी
लड़कियां खेल में देश का नाम रोशन करने में लगी हैं। खेल के मैदान में हम लड़कियों को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है जिस पर सरकार या फेडरेशन का कोई ध्यान नहीं है। टूर्नामेंट या प्रैक्टिस के जाने पर चेंजिंग रूम न होने से कठिनाइयां उठानी पड़ती हैं। -जानवी सलूजा, बैडमिंटन खिलाड़ी
महिला खिलाड़ियों के सामने सबसे बड़ी समस्या शौचालय और चेंजिंग रूम हैं। इनके न होने के चलते सुरक्षा का खतरा भी सताता है। जब कभी किसी गांव या शहर से काफी दूर ग्राउंड पर मैच होते हैं तो वहां ये व्यवस्थाएं नहीं होने से महिला खिलाड़ियों को परेशानी उठानी पड़ती है। -साधना, हैंडबॉल प्लेयर