कानपुर। कई जिलों में धोखाधड़ी कर लोगों के करोड़ों रुपये ठगी के मामले में आरोपी कर्मभूमि रियल इस्टेट लिमिटेड कंपनी की निदेशक रही मथुरा के कृष्णानगर निवासी राजेश्वरी सेंगर की अग्रिम जमानत अर्जी अपर जिला जज 13 रश्मि सिंह ने खारिज कर दी है।
सेबी के जनरल मैनेजर द्वारा कर्मभूमि रियल इस्टेट लिमिटेड कंपनी के खिलाफ धोखाधड़ी, ठगी और सार्वजनिक धन की हेराफेरी के आरोप में कंपनी के निदेशकों, व्यावसायिक योजनाओं के लाभार्थी, प्रबंधक और प्रमोटर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के लिए आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा (ईओडब्लू) में शिकायत की गई थी। जांच के बाद ईओडब्ल्यू इंस्पेक्टर मो. जैनुद्दीन अंसारी ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें आरोप था कि कर्मभूमि रियल इस्टेट लिमिटेड कंपनी द्वारा सामूहिक निवेश योजना चलाकर जनता से धन वसूली की जा रही है लेकिन कंपनी द्वारा जनता के धन की वसूली के लिए सेबी से रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं किया गया है।
कंपनी पर बिजनौर, मथुरा, पीलीभीत, मुरादाबाद व अन्य जिलों में कंपनी के कार्यालय खोलकर लोगों को कम समय में धन दोगुना, तिगुना करने का लालच देकर योजनाओं में निवेश कराया गया। निदेशक राजेश्वरी सेंगर भी मुकदमे में नामजद हैं। गिरफ्तारी से बचने के लिए राजेश्वरी ने अग्रिम जमानत अर्जी कोर्ट में दाखिल की थी। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने गंभीर अपराध मानकर राजेश्वरी की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी।
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गैरइरादतन हत्या में आठ दोषियों को 10-10 साल कैद
एक परिवार की मां व उसके चार बेटों को तो दूसरे परिवार के दो सगे भाइयों को हुई सजा
तीन फीट रास्ते के विवाद में 10 साल पहले चले थे लाठी-डंडे, बुजुर्ग पहलवान की हुई थी मौत
संवाद न्यूज एजेंसी
कानपुर। तीन फीट के रास्ते के विवाद में 10 साल पहले हुई मारपीट के दौरान बुजुर्ग पहलवान की मौत से संबंधित मुकदमे में अपर जिला जज 11 सुभाष सिंंह ने आठ दोषियों को 10-10 साल कैद और पांच-पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। दोषियों में एक परिवार की मां और उसके चार बेटे और दूसरे परिवार के दो सगे भाई शामिल हैं।
नवाबगंज के पहलवानपुरवा में 17 जून 2016 को रामचंद्र की पत्नी रामश्री, उसके बेटे कृष्णा उर्फ किशन, विनोद, विष्णु व अजय और मुंशीलाल के बेटे राजेंद्र व आनंद और सुरेंद्र की पत्नी बीनू निषाद ने एक राय होकर पड़ोस में रहने वाले अयोध्या प्रसाद के घर पर हमला बोल दिया। अयोध्या व उसके परिवारवालों को लाठी-डंडों से बुरी तरह मारा पीटा। कुल्हाड़ी के वार से अयोध्या प्रसाद बुरी तरह जख्मी हो गए थे। जिन्हें अस्पताल ले जाया गया जहां उनकी मौत हो गई थी।
मामले में अयोध्या के बेटे विनोद ने नवाबगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। विवेचना के बाद रामश्री, कृष्णा, विनोद, विष्णु, अजय, राजेंद्र, आनंद और बीनू निषाद के खिलाफ बलवा और गैर इरादतन हत्या के आरोप में चार्जशीट कोर्ट भेजी गई थी। अभियोजन की ओर से दस गवाह कोर्ट में पेश किए गए। सबूतों और गवाहों के आधार पर कोर्ट ने दोनों महिलाओं रामश्री व बीनू सहित सभी आठ को दोषी मानकर सजा सुनाई।
मुकदमा लड़ते-लड़ते बेटा बन गया वकील
अयोध्या प्रसाद एक पहलवान थे। मारपीट के दौरान अयोध्या की मौत हो गई थी। इसकी रिपोर्ट उनके बेटे विनोद ने दर्ज कराई थी। विनोद ने बताया कि मुकदमे में वही पैरवी करते थे। इस दौरान उन्होंने एलएलबी की परीक्षा पास की और वह खुद भी वकील बन गए। वादी मुकदमा विनोद ने बताया कि पिता अयोध्या प्रसाद ने वर्ष 2014 में शंकरलाल से जमीन खरीदी थी। जमीन के आगे का हिस्सा मुंशीलाल का था। मेरी जमीन की रजिस्ट्री के नक्शे में दोनों प्लाॅट के बीच में तीन फीट की गली थी लेकिन मुंशीलाल गली पर छत बनवाकर कब्जा कर रहे थे और रास्ता किनारे से दे रहे थे। घटना के दिन पिता अयोध्या इसी गली में बोरिंग की पाइप लाइन डलवा रहे थे जिसका मुंशीलाल व उनके लड़कों ने विरोध किया। वाद-विवाद के दौरान मारपीट हो गई जिसमें कुल्हाड़ी के वार से अयोध्या की मौत हो गई।