कानपुर देहात। बिस्किट के अधिक रुपये लेने का विरोध करने पर 13 वर्षीय किशोर को मिट्टी का तेल डालकर जिंदा जलाने के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या चार की अदालत ने 16 साल बाद महिला दुकानदार ममता को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 11 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड न जमा करने पर उसे डेढ़ माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
अकबरपुर क्षेत्र के धारमपुर गांव में 16 अगस्त 2010 को किसान कपूर सिंह ने मुकदमा दर्ज कराया था। उन्होंने बताया था कि उनका भतीजा संदीप (13) गांव में भैरव की पत्नी ममता की दुकान पर बिस्किट लेने गया था। उसने पांच रुपये का सिक्का दिया और पारले-जी का छोटा पैकेट लिया। ममता ने रुपये वापस नहीं किए तो संदीप ने कहा कि बिस्किट दो रुपये का है तीन रुपये वापस कर दो। आरोप था कि रुपये मांगने से गुस्साई ममता घर के अंदर से मिट्टी का तेल लाई और संदीप पर डालकर आग लगा दी। आग की लपटों से घिरा संदीप चीखता हुआ वहां से भागा। आसपास के लोगों ने आग बुझाकर उसे अस्पताल पहुंचाया। वह करीब 90 प्रतिशत झुलस गया था। कानपुर के अस्पताल में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई थी।
मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या चार में चल रही थी। मंगलवार को अदालत में अभियोजन और बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने अपने-अपने तर्क रखे। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने ममता को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।