जालौन में पारिवारिक कलह में महिला ने अपने 11 माह के मासूम बच्चे के साथ रजाई ओढ़कर आग लगा ली। चीख पुकार सुनकर घरवालों ने जब आग का गोला बनी महिला व बच्चे को देखा तो किसी तरह आग पर काबू किया लेकिन तब तक महिला की मौत हो चुकी थी। जबकि बच्चे ने झांसी ले जाते वक्त दम तोड़ दिया।
एसपी स्वामी प्रसाद का कहना है कि महिला का अपनी सास से खेत पर जाने को लेकर विवाद हुआ था। चाचा दुर्गा प्रसाद ने देर शाम वंदना के पति, सास-ससुर और देवर के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई है। कोतवाली क्षेत्र के ग्राम अकोढ़ी दुबे निवासी शैलेंद्र पाल की पत्नी वंदना देवी (26) के कमरे से रविवार की देर रात आग की लपटों के साथ चीख पुकार सुनकर घरवाले दौड़े तो देखा कि वंदना और उसका 11 माह का पुत्र दीपराज दोनों ही लपटों से घिरे हैं।
झांसी जाते समय रास्ते में मासूम की भी मौत हो गई
परिजनों ने किसी तरह आग बुझाई लेकिन तब तक वंदना दम तोड़ चुकी थी। दीपराज को गंभीर हालत में परिजन जिला अस्पताल लेकर पहुंचे जहां से डाक्टरों ने उसे झांसी रेफर कर दिया। झांसी जाते समय रास्ते में मासूम की भी मौत हो गई। सूचना पाकर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। सोमवार सुबह तक वंदना के मायके वाले भी नावली थाना रेढ़र से पहुंच गए।
वंदना के चाचा दुर्गा प्रसाद ने बताया कि वंदना के पिता कर्नाटक में पानी पूरी का काम करते हैं। इस समय वह कर्नाटक में हैं। आरोप लगाया कि वंदना के पति शैलेंद्रपाल का चरित्र ठीक नहीं है। शैलेंद्र के किसी महिला के साथ अवैध संबंध थे, जिसकी जानकारी वंदना को होने पर आएदिन शैलेंद्र उसके साथ मारपीट करता था। कई बार सुलह समझौता भी हुआ।
महिला से संबंध को लेकर पति-पत्नी के बीच तनाव बढ़ता गया
इसी बात से नाराज शैलेंद्र ने अपने पिता मलखान, भाई बृजेश व मां के साथ मिलकर वंदना व उसके बच्चे को जलाकर मार डाला है। कोतवाल देवेंद्र सिंह का कहना है कि फिलहाल चाचा की तहरीर पर चारों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया गया है। एसपी ने बताया कि परिवार में पिछले कुछ दिनों से कलह चल रही थी और रविवार को भी वंदना की अपनी सास के साथ खेत पर जाने से मना करने पर कहासुनी हुई थी।
परिजनों के मुताबिक वंदना और शैलेंद्र की शादी 2011 में हुई थी। शादी के बाद उनके एक बच्चा भी हुआ था लेकिन दो साल बाद ही उसकी मौत हो गई थी। काफी समय बाद करीब साल भर पहले ही जब दीप का जन्म हुआ तो पूरा परिवार बहुत खुश था, लेकिन धीरे-धीरे एक महिला से संबंध को लेकर पति-पत्नी के बीच तनाव बढ़ता गया और आखिरी में वंदना को अपने बेटे के साथ जीवनलीला ही समाप्त करनी पड़ गई।