जलाई गई महिला के शव का पुलिस डीएनए टेस्ट कराने की तैयारी में है। सीओ सिटी वैभव कृष्ण पांडेय ने बताया कि बच्चों या उसके मायकेपक्ष के लोगों से शव के अवशेष का डीएनए टेस्ट कराया जाएगा। इससे मुकदमे में ये भ्रम न रहे कि शव बबिता का है या किसी और का।
कई साल पहले बैदपुरा थाना क्षेत्र में एक महिला संदिग्ध हालात में फांसी पर लटकी मिली थी। पोस्टमार्टम में गला घोटकर हत्या की पुष्टि हुई थी। गांव में दहेज हत्या की भी चर्चा थी। इस मामले में थाने के तत्कालीन दरोगा होरीलाल वादी बने थे। दूसरे पक्ष के वकील के तर्क पर हाईकोर्ट ने दहेज हत्या की धारा लगाने पर तत्कालीन एसपी को तलब कर लिया था। पुलिस की जांच और साक्ष्यों के आधार पर सिविल कोर्ट ने पिछले महीने ही हत्यारों को सुनाई थी। उस समय बैदपुरा के थानाध्यक्ष सतेंद्र यादव थे, अब वह एसओजी प्रभारी हैं।
महिला को जिंदा जलाना जघन्यतम अपराध है। ऐसे मामलों में गांव का चौकीदार या पुलिस खुद वादी बन कर अज्ञात में मुकदमा दर्ज कराए, जब परिजन आ जाएं तो उसकी तहरीर के आधार पर उसी मुकदमे में नामजद आरोपियों के नाम जोड़े जा सकते हैं। पुलिस की ऐसी ही लापरवाही के कारण समाज में अपराध बढ़ते हैं। रवींद्र यादव, पूर्व शासकीय अधिवक्ता
पुलिस को तुरंत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू करनी चाहिए। इटगांव के जघन्यतम मामले में पुलिस ढिलाई बरत रही है। गांव के चौकीदार को पूरे मामले की जानकारी होती है। थाना पुलिस उसे वादी बनाए या फिर खुद वादी बने। मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर देनी चाहिए। रामनाथ सिंह यादव, सेवानिवृत्त पुलिस उपाधीक्षक
मृतका के मायकेवालों का इंतजार किया जा रहा है, पुलिस उनसे संपर्क में है। मायकेवालों की तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर जांच की जाएगी। वैभव कृष्ण पांडेय, सीओ सिटी