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PHOTOS: सरकारी अस्पताल में ‘अंधविश्वास का मेला’

Sat, 05 Aug 2017 08:00 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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सुनिया के गोद में बच्चे का शव, चढ़ावा चढ़ाती महिलाएं।
हमीरपुर के महिला अस्पताल के बाहर ‘अंधविश्वास का मेला’ लग गया। हर कोई मृत नवजात बच्चे के दर्शन को व्याकुल नजर आ रहा था। जिसको मौका मिला वो उसे छूते ही रुपये चढ़ाकर मन्नतें मांगने लगा। इमिलिया की एक गर्भवती को अविकसित मृत बच्चा पैदा हुआ। अंधविश्वास के चलते महिला की सास की सहेली बच्चे के शव को गोद में लेकर अस्पताल गेट पर बैठ गई। मृत बच्चे को देवता का रूप मानते हुए लोग पूजा-पाठ शुरू कर चढ़ावा चढ़ाने लगे। चिकित्सकों के समझाने पर अंधविश्वास में डूबे लोगों को होश आया और बच्चे के शव को अपने गांव ले गए।  
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बच्चे के  शव को दिखाता महिला का जेठ सुरेश।
उत्तर प्रदेश में हमीरपुर मुस्करा थानाक्षेत्र के इमिलिया गांव निवासी नरेश कुमार विश्वकर्मा की पत्नी रन्नो (22) प्रसव पीड़ा होने पर महिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया। यह उसका पहला बच्चा था। परिजन उसे प्राइवेट वाहन से जिला अस्पताल लाए। सुबह करीब छह बजे महिला को अस्पताल में भर्ती किया गया। चिकित्सक डा.पूनम सचान महिला की साधारण डिलेवरी कराई। जहां उसे अविकसित मृत बच्चा पैदा हुआ। मृत बच्चा पैदा होने की जानकारी महिला की सास मुलिया देवी को होने पर वह सुधबुध खोकर रोने लगी। इसी बीच मुलिया के साथ आई उसकी पड़ोसन सुनिया बच्चे के शव को लेकर अस्पताल गेट के बाहर बैठ गई। जिससे अंधविश्वास के चलते लोग उसकी पूजा पाठ में जुट गए और चढ़ावा चढ़ाने लगे। करीब दो घंटे चले पूजा पाठ के बाद पहुंचे चिकित्सकों ने महिला को समझाया बुझाया और यहां से घर जाने को कहा। जिस पर महिलाएं मान गई और परिवार के सभी लोग बच्चे के  शव को लेकर अपने गांव चली गई।
 
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रोती बिलखती मां मुलिया।
डिलेवरी के नाम पर चिकित्सक पर रुपये लेने का आरोप
गर्भवती महिला के जेठ सुरेश ने आरोप लगाया कि डिलेवरी के नाम पर चिकित्सक ने उससे दो हजार रुपये लिए और यह कहते हुए अस्पताल परिसर में परिजनो के साथ हंगामा करने लगा। चिकित्सक डा.पूनम ने पैसे लिए जाने की बात से इंकार किया है। उधर सीएमएस आरके सचान ने बताया कि शिकायतकर्ता को पैसे वापस हो गए हैं। पैसे किसने वापस किए इसका वह जवाब नहीं दे सके।
 

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चढ़ावा का रुपया गिनती सुनिया।
आठ माह का था नवजात 
जिला महिला अस्पताल की स्त्रीरोग विशेषज्ञ डा.पूनम सचान ने बताया कि महिला के सात से आठ माह का पेट में बच्चा था। जिसे भर्ती किया गया। कहा कि डिलेवरी होने में समय नहीं लगा। बताया कि कुछ गर्भवती महिलाओं में गर्भ के समय बच्चे का विकास नहीं हो पाता। यह एननकेफैली नामक बीमारी होती है। जो बिना सिर का बच्चा होता है। बताया कि गर्भ के शुरुआत की तीन माह में महिला का चेकअप वगैरह नहीं कराया गया। जिससे फालिक एसिड की कमी हो गई।
 
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अविकसित पैदा हुआ नवजात
बीमारी के चलते नहीं हुआ विकसित 
महिला अस्पताल के बालरोग विशेषज्ञ डा.आरएस यादव ने बताया कि न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट नाम की बीमारी होने से बच्चे का पूर्ण विकास नहीं हो पाता। साथ ही गर्भावस्था के शुरुआत के  तीन माह में फालिक एसिड की दवाएं भी न खिलाए जाने से यह बीमारी होती है। इसके साथ चिकित्सक ने आनवंशिक कारण भी बताया।
 
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अस्पताल परिसर में लगी भीड़।
कुपोषण के कारण होती स्थित विकृत 
जिला विज्ञान क्लब के समन्वयक डा.जीके द्विवेदी ने बताया कि बच्चों में ऐसे बदलाव जीन्स के परिवर्तन या हार्मोंस के कारण हो जाते हैं। कुपोषण के कारण भी ऐसी विकृत स्थित उत्पन्न हो जाती है। इसमें अंध विश्वास में न पड़कर जनमानस में वैज्ञानिक सोच पैदा कर ने की आवश्यकता है।
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