कानपुर देहात। किसी भी कारण वश स्कूल छोड़ने वाली छात्राओं को फिर से स्कूल लाने की जिम्मेदारी परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों को दी गई है। इसके लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने शाला त्यागी अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत स्कूल छोड़ चुकी छात्राओं के माता पिता से शिक्षक मिलेंगे, उन्हें बेटियों को स्कूल भेजने के लिए प्रेरित करेंगे। पांच से अधिक छात्राओं का दाखिला कराने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया जाएगा।
कोरोना संक्रमण के चलते शैक्षिक व्यवस्था प्रभावित रही है। इससे बड़ी संख्या में छात्राओं ने स्कूल छोड़ दिया है। इसे गंभीरता से लेते हुए सरकार ने चिंता जताई है। साथ ही बालिकाओं को शिक्षित करने के लिए शाला त्यागी अभियान चलाने के निर्देश बेसिक शिक्षा विभाग को दिए हैं। इस पर विभाग ने छात्राओं का दोबारा दाखिला कराने की कवायद शुरू की है।
विभाग उन सभी छात्राओं का स्कूल में दाखिला कराएगा जो किसी भी कारण से स्कूल छोड़ चुकी हैं। इसके लिए शिक्षक छात्राओं के माता पिता से मिलकर जागरूक करेंगे। स्कूल शिक्षा महानिदेशक विजय किरन आनंद ने जारी आदेश में कहा कि है स्कूल छोड़ने वाली छात्राओं की समस्या समझते हुए उनका तत्काल निदान कराया जाए। इसके साथ ही स्कूल जाने के लिए प्रेरित किया जाए।
छात्राओं की बनेगी सूची
योजना के तहत स्कूल छोड़ने वाली छह से 14 वर्ष तक की आयु वाली छात्राओं को चिह्नित किया जाएगा। छह वर्ष की छात्रा को कक्षा एक में प्रवेश दिया जाएगा। प्रधानाध्यापकों को निर्देश दिया गया है कि स्कूल छोड़ने वाली छात्राओं की प्रत्येक कक्षावार सूची तैयार करें। इसमें कक्षा के साथ छात्रा का नाम, अभिभावक का नाम, स्कूल छोड़ने का कारण दर्ज किया जाएगा।
अभिभावकों से संपर्क करके उनकी सहमति के साथ छात्राओं का स्कूल में दाखिला कराया जाएगा। कितनी छात्राओं का फिर से दाखिला किया गया है, इसका विवरण एक अलग रजिस्ट्रर में दर्ज किया जाएगा।
शाला त्यागी अभियान के बाबत सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया गया है। इसमें सभी शिक्षक छात्राओं के माता पिता से संपर्क कर उन्हें स्कूल भेजने के लिए प्रेरित करेंगे। खंड शिक्षा अधिकारी इसकी नियमित मानीटरिंग करेंगे। इसमें लापरवाही करने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई की जाएगी।
-सुनील दत्त, बीएसए