कानपुर से गिरफ्तार हुए हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकी कमरुज्जमा के बारे में चौंका देने वाली बातें सामने आई हैं। आईजी एटीएस असीम अरुण के मुताबिक आतंकी बनने से पहले कमरुज्जमा नवरात्रि का त्योहार मनाता था और उपवास भी रखता था।
एेसे में कहा जा रहा है कि वहाबी विचारधारा से जुड़ने से पहले कमरुज्जमा काफी उदारवादी था। वर्ष 2008 में रिपब्लिक ऑफ पलाऊ जाने के बाद उसमें काफी बदलाव आ गए और वहां से लौटने के बाद वह कश्मीर चला गया।
हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकी कमरुज्जमा
आईजी ने बताया कि करीब चार साल तक जब वह रिपब्लिक आफ पलाऊ में रहा तो वहां अक्सर होने वाली जमात में शामिल होता था। वहां जमात के लिए आस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया से लोग आते थे। जमात में शामिल होने के बाद उसका झुकाव वहाबी विचारधारा की तरफ हो गया।
वर्ष 2012 में भारत लौटने के बाद जुलाई 2013 में जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में कपड़े बेचने का काम करने लगा। वर्ष 2013 से 2017 के बीच वैवाहिक समारोहों व अन्य पारिवारिक कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए आता जाता रहा।
हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकी कमरुज्जमा
यह बात भी सामने आयी है कि कमर के साथ कानपुर में रहने वाले दो साथियों में से एक का हिजबुल कोड नेम तौफीक है। जब कमर को कानपुर जाना था तो वह अवध असम एक्सप्रेस से लखनऊ में उतरा था। यहां तौफीक उसे लेने आया था। तौफीक के साथ ही कमर कानपुर तक बस से गया था। कमर का साथी सईदुल आलम जिसे असम पुलिस ने गिरफ्तार किया है वह भी हिजबुल मुजाहिद्दीन से जुड़ा हुआ है।