कानपुर में मध्यस्थता केंद्र में हुए समझौते और हाईकोर्ट के आदेश के 9 साल बाद भी पत्नी द्वारा ससुराल वापस न लौटने पर पति ने तलाक की मांग की जिसे पारिवारिक न्यायालय ने स्वीकार कर लिया है। कल्याणपुर निवासी युवक ने फतेहपुर की युवती से 11 फरवरी 2005 को विवाह किया था।
शादी के 3 माह बाद ही पत्नी मायके चली गई इसके बाद लौट कर वापस नहीं आई। कई बार बुलाने के बावजूद ससुराल न लौटने पर पति ने 2007 में विदाई का मुकदमा दाखिल कर दिया। पत्नी ने भी 2008 में दहेज व घरेलू हिंसा के मुकदमे दर्ज करा दिए।
वर्ष 2012 में पति हाईकोर्ट पहुंचा और मध्यस्थता केंद्र में समझौते की बात की। बेटी के भविष्य के लिए ₹600000 की एफडी और पत्नी को प्रतिमाह ₹6000 गुजारा देना तय हो गया। समझौते पर हाई कोर्ट की मुहर भी लग गई। इसके बावजूद पत्नी ने घर वापसी नहीं की।
कई बार बुलाने पर भी जब वह वापस नहीं आई तब वर्ष 2018 में पति ने पारिवारिक न्यायालय में तलाक के लिए अर्जी दाखिल कर दी। कोर्ट ने पत्नी से घर वापस न लौटने का कारण पूछा लेकिन वह कोई सही जवाब नहीं दे सकी। इस पर कोर्ट ने पति की तलाक की अर्जी मंजूर कर ली है।