जाजमऊ में अवैध निर्माण ढहने से हुई मौतों के मामले में गुरुवार को छोटे कर्मचारियों को निपटा दिया गया लेकिन बड़े अफसर बचे हैं। सब कह रहे हैं कि बड़े अफसरों की जिम्मेदारी नहीं है क्या। अब सवाल उठता है कि पुलिस, प्रशासन और डेवलपमेंट अथारिटी का इतना बड़ा तंत्र है, फिर भी महीनों से सात मंजिला अवैध भवन का निर्माण कैसे होता रहा।
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नक्शा पास करने सहित तमाम मामले किसके अधिकार क्षेत्र में
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जाजमऊ हादसे के बाद मलबा हटाते कर्मी
- फोटो : अमर उजाला, कानपुर
ये भी हैं जिम्मेदार कमिश्नर कमिश्नर मोहम्मद इफ्तिखारुद्दीन केडीए बोर्ड के अध्यक्ष हैं। नक्शा पास करने सहित तमाम मामलों में उनका दखल होता है। सीलिंग की रिपोर्ट भी उनको जाती है लेकिन हमेशा की तरह इसको हल्के में लिया जाता है। जाजमऊ में हो रहे अवैध निर्माण की जानकारी उनको क्यों नहीं मिल सकी। महताब आलम ने एक घर से दूसरे घर तक जाने के लिए सड़क पर ओवरब्रिज तक बना लिया, इसकी भनक तक कमिश्नर को नहीं मिल सकी।
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केडीए का मुखिया होने के नाते अवैध निर्माण रोकने की सीधी जिम्मेदारी वीसी की
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इमारत के मलबे तले दब कर मरी महिला मजदूर के शव को ढकता हुआ सेना का जवान
- फोटो : अमर उजाला, कानपुर
आखिर क्यों? केडीए वीसी केडीए का मुखिया होने के नाते अवैध निर्माण रोकने की सीधी जिम्मेदारी वीसी की है। यदि कोई अवैध निर्माण किया जाता है तो उसे रुकवाने, सील करने और ध्वस्तीकरण के आदेश केडीए वीसी जारी कर सकता है पर इस मामले को अन्य सभी मामलों की तरह हल्के में लिया गया। केडीए के अफसरों की मानें तो बिल्डिंग बाइलॉज के मुताबिक अवैध निर्माण पर कोई कार्रवाई न करने पर वीसी की जिम्मेदारी होती है, लेकिन यदि एक बार कार्रवाई हो गई तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित थाना और पुलिस की हो जाती है।
इतनी बड़ी बिल्डिंग बन रही था और अवैध घटिया निर्माण की जानकारी किसी को नहीं
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बिल्डिंग का मलबा हटाते हुए सेना के जवान
- फोटो : अमर उजाला, कानपुर
एसीएम क्षेत्रीय विवाद और मामलों के निस्तारण के लिए अपर नगर मजिस्ट्रेट (एसीएम) की तैनाती की जाती है। शहर में सात एसीएम हैं। जाजमऊ क्षेत्र का काम एसीएम-2 सतीश चंद्र के पास है। मजिस्ट्रेट का स्थानीय तंत्र काम करता है लेकिन जाजमऊ के अवैध घटिया निर्माण की जानकारी नहीं मिल सकी। पुलिसिया सूचना भी एसीएम तक नहीं पहुंच सकी। तहसीलदार कानूनगो, लेखपाल जिला प्रशासन का जो स्ट्रक्चर है, उसके मुताबिक हर प्रशासनिक क्षेत्र में नायब तहसीलदार की तैनाती की जाती है।
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अवैध निर्माण और अवैध कब्जे के तमाम मामले आते हैं सामने
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जाजमऊ में ढेर हुई बहुमंजिला इमारत
- फोटो : अमर उजाला, कानपुर
नायब तहसीलदार क्षेत्रीय कानूनगो और लेखपाल से रिपोर्ट लेता है, फिर वरिष्ठ अधिकारियों को मामले से अवगत कराया जाता है। जाजमऊ के अवैध निर्माण मामले में कानूनगो, लेखपाल का सूचना तंत्र भी फेल रहा है। इसी रास्ते सूचना जिलाधिकारी तक जाती है। पुलिस इंस्पेक्टर क्षेत्रीय इंस्पेक्टर की जिम्मेदारी होती है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखें। चकेरी और जाजमऊ क्षेत्र ऐसा है, जहां अवैध निर्माण और अवैध कब्जे के तमाम मामले सामने आते हैं। इनमें पुलिस का दखल भी होता है।
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सपा नेता ने बिना अनुमति तान दी थी बहुमंजिला इमारत
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जाजमऊ की धराशायी बिल्डिंग के मालिक महताब आलम का घर
- फोटो : अमर उजाला, कानपुर
सपा नेता ने बिना अनुमति अवैध निर्माण खड़ा कर दिया लेकिन पुलिस ने कोई सवाल नहीं उठाया। सार्वजनिक रोड पर ओवरब्रिज बन गया, इसकी भी शिकायत नहीं मिली। ये काम पूर्व में तैनात इंस्पेक्टर के कार्यकाल में हुआ लेकिन वर्तमान इंस्पेक्टर ने भी कार्रवाई की जहमत नहीं उठाई। नगर निगम जाजमऊ में सपा नेता की तरफ से महीनों से सड़क पर बिल्डिंग मैटेरियल डालकर अवैध निर्माण कराया जा रहा था, पर नगर निगम ने भी सुध नहीं ली। सड़क पर बिल्डिंग मैटेरियल डालने के मामले में भी कार्रवाई नहीं की।
जाजमऊ बिल्डिंग हादसे के बाद मलबे में दबे हुए लोगों का बाहर निकालते एनडीआरएफ कर्मी
- फोटो : अमर उजाला, कानपुर
इस मामले की जांच नगर आयुक्त उमेश प्रताप सिंह ने जरूर कराई और यह कहकर कि अवैध निर्माण केडीए की जमीन पर हो रहा था, बला टाल दी। नगर निगम जोन-2 के अधिशासी अभियंता एसके सिंह का कहना है कि शहरी क्षेत्र में निर्माण की जिम्मेदारी केडीए की है। सुपरवाइजर, मेट, चौकीदार, बेलदार अवैध निर्माण होने की जानकारी सुपरवाइजर, मेट, चौकीदार, बेलदार आदि संबंधित क्षेत्र के प्रर्वतन विभाग केअवर अभियंता को देते हैं। अवर अभियंता, सहायक अभियंता और अधिशासी अभियंता पर उच्चाधिकारियों की अनुमति से निर्माण रुकवाने, सील करने और ध्वस्तीकरण की जिम्मेदारी होती है।