कानपुर। सूफी संत हजरत अलाउल हक वद्दीन मो.यूसुफ उर्फ मखदूम शाह आला के सालाना 768 वें उर्स का नजारा बड़ा दिलकश रहा। कुल शरीफ के मौके पर आल इंडिया गरीब नवाज काउंसिल के कौमी सदर मौलाना मो. हाशिम अशरफी ने लोगों से आंख बंदकर अपने गुनाहों को याद कर तौबा करने के लिए कहा। हजारों की संख्या में जुटे लोगों ने आंखें बंद क अपने गुनाहों को यादकर फूट-फूट कर रोए। सभी से तौबा कराई गई। फिजा में हिचकियां गूंजती रहीं। मुल्क में भाईचारे, अमन-चैन, बीमारों को शिफा की दुआ की गई।
बुधवार को जाजमऊ स्थित दरगाह पर मखदूम शाह आला के उर्स के आखिरी दिन अकीदतमंदों की भीड़ उमड़ी। दरगाह के आसपास की हर गली खचाखच भरी रही। सुबह 11 बजे कुल शरीफ की रस्म हुई। इसके पहले मौलाना अशरफी ने तकरीर की। उन्होंने कहा कि इल्म हासिल करो क्योंकि जरूरत के मुताबिक इल्म का हासिल करना हर मर्द और औरत पर फर्ज है। इल्म सर्विस की नीयत से नहीं बल्कि उस इरादे से
हासिल करो कि जिहालत के अंधेरे से निकल कर बाहर आओ। आपस में मोहब्बत और भाईचारे को आम करें। पड़ोसियों से मोहब्बत, हमदर्दी और नरमी का बरताव करें। जुआ, सट्टा, गांजा, अफीम, चरस हर तरह के नशे से परहेज करें। कुल शरीफ के मौके पर दुआ कराई गई। एक साथ बड़ी संख्या में लोगों ने आमीन कहा। बाद में देर रात तक आस्ताना पर अकीदतमंदों के आने का सिलसिला जारी रहा। दरगाह कमेटी के अध्यक्ष इरशाद आलम में जिला इंतजामियां और विभिन्न विभागों का शुक्रिया अदा किया। आस्ताना के सज्जादानशीं अदनान राफे फारूकी, शहरकाजी साकिब अदीब मिसबाही, समाजवादी छात्रसभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. इमरान, कारी मो. अहमद अशरफी, हाफिज मो. अरशद अशरफी, विधायक मो. हसन रूमी, विधायक अमिताभ बाजपेई, सपा महानगर अध्यक्ष हाजी फजल महमूद, हाजी अबरार अहमद, इखलाक अहमद डेविड, डॉ.तारिक मुस्तफा, इरफान अंसारी, नफीस नूरी, शादाब आलम आदि रहे।
उर्स पर पांच खास नसीहत
-बच्चे, युवा मोबाइल फोन नहीं किताबों से पढ़ें
-सोशल मीडिया, नेट का गलत इस्तेमाल न करें
-मां-बाप के अलावा बड़ों की फरमाबरदारी करें
-हर व्यक्ति जीवन में एक पेड़ जरूर लगाए
-पानी की फिजूल खर्ची न करें, जल बचाएं
नीम की पत्तियों पर टूट पड़े लोग
मखदूम शाह आला की दरगाह परिसर में लगे नीम की पत्तियों को खाने के लिए लोग टूट पड़े। यह मान्यता है कि कुल शरीफ के मौके पर नीम की पत्तियों की कड़ुवाहट खत्म हो जाती है और बीमारियों से शिफा मिलती है।
हर गली-कूचे में चला लंगर
-उर्स के मौके पर दरगाह शरीफ के बाहर और इस तरफ आने वाली हर गली और कूचे में लंगर चलता रहा। शहर और बाहर से आने वाले जायरीनों में लंगर बांटा गया। पानी, चाय, कॉफी और खाने-पीने का सामान वितरित किया। दरगाह के आसपास बच्चों के लिए खिलौनों आदि की दुकानें लगाई गईं।