कानपुर। खरना पूजन के दूसरे दिन 36 घंटे का निर्जला व्रत रखने वाली महिलाओं ने सोमवार को डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर परिवार की सुख-समृद्धि मांगी। घाटों पर कबहुं ना छूटी छठी मइया, हमनी से बरत तोहार, हमरो छठ में कवनो कमी नाहीं हो जैसे गीत गूंजते रहे। रोशनी से जगमगाते शहर के 40 बड़े, सैकड़ों छोटे और कृत्रिम तालाबों के साथ नहरों किनारे घाटों पर करीब साढ़े पांच लाख श्रद्धालु पहुंचे और पूजा-अर्चना कर सूर्यदेव को अर्घ्य दिया। पूजा-अर्चना के बाद घाटों पर आतिशबाजी भी की गई।
श्रद्धा और आस्था के साथ सिर पर बांस की टोकरी (दउरा या डाला), सूप लिए महिलाएं परिजनों संग दोपहर बाद पनकी, अर्मापुर, सीटीआई, दबौली, साकेतनगर, रतनलालनगर, सचान नहर, छोटा व बड़ा सेंट्रल पार्क शास्त्रीनगर, नमक फैक्टरी ग्रीन बेल्ट, बर्रा, नौरैया खेड़ा, दबौली वेस्ट, कमलानगर, लाजपतनगर, शिवाजीनगर के कृत्रिम तालाबों के किनारे नंगे पैर पहुंचने लगी थीं। घाटों पर सामूहिक रूप से मंत्रों का जाप किया गया और भजन गाए गए। महिलाओं ने पानी में खड़े होकर छठी मइया से मनोकामना पूरी करने का आशीर्वाद मांगा और डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर सिंदूर दान की परंपरा निभाई। लंबे समय से व्रत रखने वाली महिलाओं ने नवविवाहिताओं को सिंदूर दिया और एक-दूसरे की मांग भरी। छठी मइया का पूजन कर सुहाग और परिवार की मंगल कामना की।
सूर्य अस्त के समय दिया अर्घ्य
सोमवार को दिनभर बादलों के पीछे सूर्यदेव छिपे रहे। इस पर व्रती महिलाओं ने पहले से तय सूर्य अस्त के समय घाटों पर पूजन किया और शाम 5:15 बजे सूर्य को अर्घ्य देकर पूजन किया।
रातभर घाट के किनारे चला जागरण
पूर्वांचल भोजपुरी छठ पूजा सेवा समिति का 50वां वार्षिकोत्सव पनकी छठ घाट पर रात भर चला। जागरण में मयंक एंड पार्टी के भजन गायक रात भर भक्तों को भाव-विभोर करते रहे। समिति के राजीव यादव ने बताया कि जागरण अस्ताचलगामी सूर्यदेव को अर्घ्य के समय से शुरू हुआ और रातभर चला। उमाशंकर यादव, आरके गिरि, हृदयेश पाठक, राजेश यादव, आरपी सिंह, विनोद दीक्षित, राहुल श्रीवास्तव, सुरेश त्रिपाठी आदि व्यवस्थाओं में लगे रहे।
दीयों की रोशनी ने बढ़ाया आकर्षण
झालरों की झिलमिलाती रोशनी, पानी में बहते असंख्य दीयों के बीच डूबते सूर्य को अर्घ्य देतीं महिलाओं से पटे पनकी, अर्मापुर और सीटीआई नहर किनारे बने घाटों की छटा देखते ही बन रही थी। रोशनी से नहाए घाटों पर छठी मइया के गूंजते गीत आस्था को बढ़ा रहे थे।
पूजा की टोकरी में ये सामग्री होती
मौसमी फल (केला, नाशपाती, शरीफा), गन्ना, नारियल, सिंदूर, चावल, धूप-अगरबत्ती, सिंगाड़ा, मूली, शकरकंद, साठी का चावल, चूरा मूंगफली, कुमकुम, सिंदूर, पान-सुपारी, घी का दीपक, सुथनी, हल्दी की गांठें, चंदन, शहद, शृंगार का सामान, सात तरह की मिठाई, आठ-दस तरह की सब्जियां पूजा की टोकरी में होती हैं।