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मॉडर्न होने के चक्कर में कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये गलतियां

Fri, 11 Jan 2019 07:11 PM IST
gaurav gaurav अशुतोष त्रिवेदी, कानपुर
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आज के इस आधुनिक युग में हर कोई किसी न किसी चीज के पीछे भाग रहा हैं और इस दौड़भाग में हम अपने मूल सिद्धांतों को भूलते जा रहे हैं। युवाओं में आकर्षक दिखने की जैसी होड़ सी मच गई है। इस बात की प्रतिस्पर्धा महानगरों में ही नहीं बल्की छोटे शहरों, कस्बों और गांवों में भी देखने को मिल रही है। भारतीय वेशभूषा पर पश्चिमी सभ्यता का ऐसे असर पड़ रहा है कि युवा अपनी समझ को खोता जा रहा है। आज के तमाम भारतीय पश्चिमी सभ्यता के पहनावे और रहन-सहन की ओर आकर्षित होते जा रहे हैं। सबसे ज्यादा यूपी, बिहार, एमपी, राजस्थान में ऐसा देखने को मिल रहा है। 
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विडम्बना यह भी है कि हमारे देश का युवा पश्चिमी सभ्यता की नकल कर रहा है और पश्चिम वाले भारतीय सभ्यता और संस्कृति को सर्वोपरि मानकर स्वीकार कर रहे हैं। कई बार बड़ा आश्चर्य होता है विदेशियों को देख कर जब वे लोग भारतीय परिधानो को पहनकर भारत भ्रमण करने आते हैं। विचित्र लगता है उन विदेशी मेहमानों को साड़ी और कुर्ता पायजामा में देखकर।

बड़े ही असमंजस में है भारतीय संस्कृति, एक तरफ विदेशी युवक और युवतियां भारतीय वस्त्रों को और परिधानों को सर्वश्रेष्ठ बता रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ भारतीय लोग पश्चिमी सभ्यता में रंगे होना चाहते हैं। यह बड़ी ही अजीब बात है कि हम अपनी सभ्यता और संस्कृति को भुल जाना चाहते हैं। हम भूल जाना चहते हैं कि सूरज सदैव पूर्व में उगता है और पश्चिम में डूबता है। लेकिन हम प्रकृति के सारे नियम एक ओर करके पता नहीं क्यों पश्चिमी सभ्यता में रंग जाना चाहते हैं। 

 

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कुछ बातें जो हम पश्चिमी सभ्यता से सीख सकते हैं...

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आज भारत के युवा इस कदर पश्चिमी सभ्यता को अपनाते जा रहे हैं कि वे ये भी भूल गए हैं कि क्या सही है और क्या गलत। आज के ज्यादातर युवा किसी न किसी तरह के नशे की चपेट में हैं और इतना ही नहीं वे नशा करने को मॉडर्न होना समझते हैं। अगर आप मॉडर्न होना ही चाहते हैं या पश्चिमी सभ्यता की नकल करना ही चाहते हैं तो उन चीजों में करें जिनमें वे हमसे बेहतर हैं। हर समाज चाहे वो पूर्वी हो या पश्चिमी उनमें कुछ पॉजिटिव पक्ष होता हैं और कुछ निगेटिव पक्ष भी। यह तो व्यक्ति पर नर्भर करता हैं कि वह पॉजिटिव पक्ष अपनाता है या नेगेटिव पक्ष चुनता है।

साफ-सफाई की आदत
हममें से ज्यादातर लोगों की आदत होती है कि कूड़े को कूड़ेदान में डालने के बजाय यहां-वहां फेंकने की। यदि आप किसी पश्चिमी देश में देखें तो आप सफाई के मामले में बड़ा अंतर पायेंगे। वे लोग अपने असपास बिल्कुुल सफाई रखते हैं और सड़क, पार्क या सार्वजनिक स्थान पर एक कागज का टुकड़ा भी नहीं फेंकते हैं।

 

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सब कुछ रखा जाता है व्यवस्थित

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कुछ पश्चिमी देशों में, विभिन्न प्रकार के कचरे जैसे प्लास्टिक, रसोई के कचरे आदि को अलग-अलग कचरा बैग में रखना पड़ता है। फिर उन्हें घर के बाहर संबंधित कचरा संग्रहकर्ताओं द्वारा एकत्र किया जाता है। लेकिन भारत में, खाली पड़े घरों में कचरा फेंकना एक आम दृश्य बन गया है। इसलिए हमें उनसे स्वच्छता की भावना सीखनी चाहिए।

यातायात के नियम
आप में से कितनों ने किसी न किसी को भारत में यातायात के नियम तोड़ते देखा है? मैंने यह कई बार देखा है। लेकिन पश्चिमी लोग यातायात पुलिसकर्मी की गैरमौजूदगी में भी यातायात के नियमों का सख्ती से पालन करते हैं।

परिवहन
भारत के मुकाबले पश्चिमी देशों में परिवहन प्रणाली बहुत अच्छी है।  

व्यावसायिकता
पश्चिमी लोगों की तरह प्रोफेशनल बनना चाहिए, जो अपने पेशेवर जीवन में अपनी निजी भावनाएं, परेशानी और व्यवहार को दखल नहीं देने देते। इसके साथ ही वे समय के बहुत पाबंद होते हैं और दूसरों के समय का भी सम्मान करते हैं।

इसलिए आगे बढ़ते हुए अपने मूल्यों और संस्कृति को सहेज कर रखना गलत नहीं है। हमें समय के साथ बेहतरी के लिए बदलना भी चाहिए, क्योंकि दुनिया में सबकुछ बदल रहा है। हमें बेहतरी और विकास के लिए अपने मूल्यों के साथ पश्चिमी संस्कृति के अच्छे मूल्य जरूर अपनाने चाहिएं। 

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