वहीं, दोनों दोस्तों के बीच में डॉ. दीक्षा थी । उन्हें क्या पता था कि उनकी मजबूत दोस्ती को डक्ट पर पड़ी कमजोर स्लैब जीवनभर का जख्म दे देगी। डॉ. हिमांशु ने बताया कि तीनों ने आर्यनगर स्थित किराये के मकान में एक साथ खाना खाना। फिर तीनों दोस्तों ने तय किया किया अपने उस कैंपस चलते हैं, जहां इतना समय बिताया।
दोनों दोस्तों ने डॉ. दीक्षा को हमेशा के लिए खो दिया
कैंपस में प्रवेश के दौरान तीनों दोस्त कैमरे में नजर भी आए हैं। डॉ. मयंक अपनी बुलेट से और डॉ. हिमांशु अपनी स्कूटी से डॉ. दीक्षा के साथ थे। करीब 10 मिनट तक परिसर में टहलने के बाद परीक्षा भवन की पांचवीं मंजिल पर चले गए। यहीं हादसा हो गया और दोनों दोस्तों ने डॉ. दीक्षा को हमेशा के लिए खो दिया।
ऐसी दोस्ती... दीक्षा को बचाने के लिए 50 फीट गहरी डक्ट में पाइप के सहारे उतर गया हिमांशु
डॉ. दीक्षा को डक्ट में गिरता देख डॉ. हिमांशु खुद को रोक नहीं पाया। उसे लगा कि दीक्षा बीच में कहीं फंसी होगी। इसके चलते वह 50 फीट गहरी डक्ट में पाइप के सहारे नीचे उतर गया। यहां दीक्षा खून से लथपथ पड़ी थी।
हैलट में डॉक्टरों ने दीक्षा को मृत घोषित कर दिया
इसके बाद हिमांशु ने अपनी पीठ से धक्का मारकर डक्ट का दरवाजा तोड़ा। उसकी पीठ पर खरोंच के गहरे निशान भी हैं। इस बीच डॉ. मयंक ने घटना की जानकारी पुलिस कंट्रोल रूम में दे दी थी। सूचना के 10 मिनट बाद मौके पर पहुंचे पीआरवी के सिपाही दीक्षा को हैलट ले गए। यहां डॉक्टरों ने दीक्षा को मृत घोषित कर दिया।
तीनों में थी गहरी दोस्ती, साथ की मेडिकल की पढ़ाई
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई एक साथ करने वाली डॉ. दीक्षा तिवारी, डॉ. हिमांशु गर्ग और डॉ. मयंक सिंह ने नौकरी भी एक साथ पाई थी। डॉ. दीक्षा और डॉ. मयंक को मेरठ मेडिकल कॉलेज में 25 जून को जॉइन करना था।डॉ. हिमांशु की भी नौकरी कानपुर मेडिकल कॉलेज में लग गई थी। अचानक हुई गहरी दोस्त की मौत से दोनों दोस्त सदमे में हैं।
छत पर मिले पैरों के घसीटने के निशान
चचेरे भाई गौरव ने बताया कि उसकी बहन दीक्षा की मौत की जो कहानी सुनाई गई है, वो ठीक नहीं लग रही है। छत पर पैरों के घसीटने के निशान हैं। मेरी बहन पैरों में चप्पल के साथ नीचे गिरी है। संदेह है कि साथी डॉक्टरों ने उसे डक्ट में धक्का दिया है। बरेली से आए दीक्षा के मौसा अरुण दुबे का आरोप था कि फॉरेंसिक टीम ने ठीक से जांच नहीं की। छत पर पैरों के घसीटने के निशान बने हुए हैं, उसे पुलिस ने नजरअंदाज किया।
दोनों दोस्तों को घर तक था आना-जाना
पुलिस ने मेडिकल कॉलेज पहुंचकर जांच शुरू की। सीसीटीवी फुटेज देखे गए, एडिशनल सीपी हरीश चंदर ने बताया कि दो साथी डॉक्टर हिरासत में हैं। उनसे पूछताछ की जा रही है। परिवार से बात करने के बाद सामने आया कि दोनों साथी डॉक्टर परिवार के भी संपर्क में थे। घर तक आना-जाना था। घटनास्थल की जांच की गई है। फोरेंसिक टीम ने बॉडी पर लगी चोट और स्पॉट की जांच की है। फोरेंसिक की जांच में भी हादसे में डॉ. दीक्षा की मौत की बात सामने आई है।
पुलिस ने पिता को देर रात तीन बजे दी सूचना
पिता प्रदीप तिवारी ने बताया कि बुधवार रात करीब तीन बजे स्वरूपनगर पुलिस ने उन्हें बेटी की मौत की सूचना दी। सूचना मिलते ही वे लोग बरेली से निकल पड़े और गुरुवार सुबह यहां आ गए। बेटी के शव को देख परिजन अपने आंसू नहीं रोक सके।
दिल की मरीज दादी को नहीं दी दीक्षा की मौत की खबर
रिश्तेदारों ने बताया कि डॉ. दीक्षा के बाबा मेजर रघुवीर तिवारी की हाल में मौत हुई है। वहीं दादी सावित्री दिल की मरीज हैं। दीक्षा की मौत की जानकारी उन्हें नहीं दी गई है। परिवार के लोग मोहल्ले वालों के भराेसे सावित्री को छोड़कर शहर आए हैं। उनका कहना था कि दीक्षा को उसकी दादी बहुत पसंद करती थी। इसलिए उन्हें घटना की जानकारी नहीं दी गई। वहीं दिल्ली में शिक्षक चाचा सुदीप व तरुण भी दीक्षा की मौत की खबर सुनकर परिवार संग बरेली के लिए निकल लिए हैं।