हिमालय से आ रहीं उत्तर पश्चिमी हवाओं ने बढ़ रहे तापमान से लोगों को राहत दिला दी। इस वजह से सामान्य से ऊपर भाग रहा पारा 48 घंटों में लुढ़ककर सीमा में आ गया। इस अवधि में अधिकतम तापमान में 5.6 डिग्री और न्यूनतम तापमान में 6.1 डिग्री की गिरावट के साथ क्रमश: 30.4 डिग्री और 16 डिग्री सेल्सियस दर्ज किए गए। अगले कुछ दिन मौसम ऐसा ही रहने की संभावना है। नमी बढ़ने पर बूंदाबांदी होने के भी आसार हैं। एक और पश्चिमी विक्षोभ बुधवार को आने की संभावना है, लेकिन यह कमजोर किस्म का है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जेट स्ट्रीम हवाओं के नीचे आने के बाद इस सर्दी में बार-बार पश्चिमी विक्षोभ आए। चक्रवाती घेरे बने रहे। इससे हिमालय से कानपुर परिक्षेत्र और गंगा के मैदानी इलाकों में आने वाली ठंडी हवाएं बाधित होती रही और शीत लहरी नहीं चल पाई। अब मौसमी गतिविधियां बदल रही हैं। ला नीना तटस्थ हो गया है और पश्चिमी विक्षोभ लाने वाली जेट स्ट्रीम हवाएं ऊपर चली गई हैं। मौसम विज्ञानियों के अनुसार इस सीजन में मौसमी गतिविधियों के कारण ठंड तो अधिक नहीं पड़ी, लेकिन मानसून अच्छा रहने की संभावना है।
कानपुर का मौसम
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वरिष्ठ मौसम विज्ञानी डॉ. एसएन सुनील पांडेय ने बताया कि जेट स्ट्रीम हवाओं के ऊपर चले जाने के कारण पश्चिमी विक्षोभ प्रभावी नहीं रहेंगे। इससे पश्चिमी हवाओं में निरंतरता और गति आएगी। श्री पांडेय ने बताया कि ला नीना को पिछले साल अक्टूबर-नवंबर में सक्रिय होना था। लेकिन, पूरे सीजन 30-40 प्रतिशत से अधिक सक्रिय नहीं हो पाया और अब तटस्थ हो गया है। इसके सक्रिय होने पर ठंड अधिक पड़ती है और तटस्थ रहने पर मानसून अच्छा आता है। हिमालय पर बर्फबारी से नमी का असर आता रहेगा। इससे गर्मी से राहत मिलती रहेगी। असर जैसे-जैसे घटेगा तापमान में इजाफा होगा।
सांकेतिक तस्वीर
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धूप की गुणवत्ता और अवधि सामान्य
सीएसए की मौसम वेधशाला के तकनीकी अधिकारी अजय मिश्रा ने बताया कि धूप की चमक की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप है। धूप निकलने की अवधि नौ से 10 घंटे बनी हुई है। यह सन शाइन आवर की औसत सामान्य अवधि मानी जाती है। उन्होंने बताया कि धूप की गुणवत्ता उसकी चमक से तय होती है। इसके स्तरीय होने पर धूप मापने वाले यंत्र में लगा कार्ड जलने लगता है। इसी कार्ड से धूप की अवधि का भी पता चलता है।