लेजर वेपन के रिसर्च वर्क में सहयोग दे रहे आईआईटी कानपुर के मैकेनिकल विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर समीर खांडेकर ने बताया कि काफी लंबे समय से इस पर रिसर्च चल रही है। आने वाले समय में देश की सुरक्षा में लेजर वेपन की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। इन लेजर हमले में न तो आवाज होती है और न ही रोशनी। यह चुपचाप टारगेट में छेद कर देती है या इतनी हीट उत्पन्न कर देती है कि टारगेट जलकर राख हो जाता है। उन्होंने बताया कि रिसर्च पूरी होने में कितना समय लगेगा, इस पर अभी कुछ कहा नहीं जा सकता।
आईआईटी का योगदान
प्रो. समीर ने बताया कि टारगेट अगर एक जगह स्थिर है, तो उसे डिफ्यूज करना आसान होता है। टारगेट एक जगह से दूसरी जगह जा रहा है, तो उसे नष्ट करना मुश्किल हो जाता है। लेजर वेपन इसमें कारगर साबित होंगे। लेकिन लेजर के तापमान को फोकस करने के लिए एक निश्चित ऊष्मा की आवश्यकता होती है। आईआईटी कानपुर इसी में सहयोग कर रहा है।