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जल्द तैयार होगा भारत का विध्वंसक हथियार: दुश्मनों की मिसाइलों को हवा में ही खाक कर देगा, नाम से ही खौफ खाएंगे दुश्मन

Fri, 13 May 2022 07:26 AM IST
हिमांशु अवस्थी शैली भल्ला, अमर उजाला, कानपुर

सार

भविष्य में युद्ध के तरीके बदलेंगे और हथियार भी। इसलिए पारंपरिक हथियारों की जगह दूर से हमला करने वाले हथियार विकसित हो रहे हैं। भविष्य में युद्ध अत्यधिक ऊर्जा वाले यानि लेजर हथियारों से लड़ा जाएगा। भारत भी ऐसे हथियार बनाने की जा रहा है, जिनके हमले से दुश्मन देशों के पसीने छूट जाएंगे। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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दुश्मन देश के फाइटर प्लेन, छोटी मिसाइल, ड्रोन को अब धरती पर बैठकर हवा में उड़ाने की तैयारी है। साथ ही 100 मीटर दूर रखे बम के पास जाए बगैर उसे डिफ्यूज किया जा सकेगा। यह सब संभव होगा लेजर हथियारों से। इसी दिशा में शोध चल रहा है। इसमें आईआईटी कानपुर की भी मदद ली जा रही है। 

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आने वाले 20 सालों में हथियारों का स्वरूप बदल जाएगा। गोला बारूद की जगह लेजर वेपन आ जाएंगे जो बिना आवाज के केवल किरणों की मदद से दुश्मन देश के टैंक, हवाई जहाज को नष्ट करने के साथ ही बम को डिफ्यूज कर सकेंगे। ऐसे हथियारों को बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एक राष्ट्रीय स्तर का प्रोग्राम बनाया है। इसमें अलग-अलग तरह के डायरेक्ट एनर्जी वेपन शामिल होंगे।
इनकी क्षमता भी अलग-अलग होगी। लेजर हथियारों की मदद से दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक, रेडियो सिस्टम, संचार सिस्टम को भी नष्ट किया जा सकेगा। संचार की कमी और कमांड न दे पाने की स्थिति में दुश्मन कमजोर हो जाता है। इससे उस पर हमला करना और आसान हो जाता है। 

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लेजर वेपन के रिसर्च वर्क में सहयोग दे रहे आईआईटी कानपुर के मैकेनिकल विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर समीर खांडेकर ने बताया कि काफी लंबे समय से इस पर रिसर्च चल रही है। आने वाले समय में देश की सुरक्षा में लेजर वेपन की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। इन लेजर हमले में न तो आवाज होती है और न ही रोशनी। यह चुपचाप टारगेट में छेद कर देती है या इतनी हीट उत्पन्न कर देती है कि टारगेट जलकर राख हो जाता है। उन्होंने बताया कि रिसर्च पूरी होने में कितना समय लगेगा, इस पर अभी कुछ कहा नहीं जा सकता। 
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आईआईटी का योगदान
प्रो. समीर ने बताया कि टारगेट अगर एक जगह स्थिर है, तो उसे डिफ्यूज करना आसान होता है। टारगेट एक जगह से दूसरी जगह जा रहा है, तो उसे नष्ट करना मुश्किल हो जाता है। लेजर वेपन इसमें कारगर साबित होंगे। लेकिन लेजर के तापमान को फोकस करने के लिए एक निश्चित ऊष्मा की आवश्यकता होती है। आईआईटी कानपुर इसी में सहयोग कर रहा है।
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