इटावा। तीन साल पहले जिले में आए वक्फ निरीक्षक एंटी करप्शन की टीम के रंगे हाथ पकड़ने के बाद पूरे विकास भवन में खलबली मची हुई है। आरोपी वक्फ निरीक्षक पर जिले में तैनाती से पहले रामपुर में भी निलंबन की कार्रवाई हो चुकी है। एंटी करप्शन टीम में इंस्पेक्टर जगदीश यादव, सूर्य प्रताप सिंह और शिशिर पराशर शामिल रहे।
2022 में राम सुमेर अल्पसंख्यक विभाग में वक्फ निरीक्षक के पद पर आगरा से आए थे। इससे पहले वह रामपुर और अलीगढ़ में तैनात रह चुके हैं। रामपुर में भी शिकायतें मिलने पर इन्हें निलंबित कर आगरा संबद्ध किया गया था। यहां से बहाल होने के बाद इन्हें इटावा में तैनाती दी गई थी। जिले में पिछड़ा कल्याण अधिकारी प्रदीप तिवारी के पास अल्पसंख्य विभाग का अतिरिक्त प्रभार था। 17 सितंबर को फिरोजाबाद की जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी निधि सिंह को इटावा का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था। ऐसे में वह सप्ताह में सिर्फ दो ही दिन इटावा आ पाती हैं। सूत्रों के अनुसार, स्थानीय अधिकारी के पास चार्ज होने तक वक्फ निरीक्षक पर शिकंजा कसा हुआ था, लेकिन जैसे ही बाहरी अधिकारी को चार्ज मिला तो वक्फ निरीक्षक ने लेनदेन का खेल शुरू कर दिया था।