वो तो जोश और उत्साह के साथ अपने मताधिकार का प्रयोग करने जा रहा था लेकिन उसे क्या पता था कि अगले ही मिनट उसके साथ क्या होने वाला है। इटावा के जसवंत नगर में वोटिंग के दौरान पुलिस की लाठी उसके लिए काल बन गई। हम बात कर रहे हैं मोहम्मद ताजुद्दीन की।
विधानसभा चुनाव में मतदान के दौरान 19 फरवरी को कस्बे में पुलिस के लाठीचार्ज में घायल हुए ताजुद्दीन ने नौ दिन तक लखनऊ पीजीआई में मौत से संघर्ष किया लेकिन सोमवार को वो ये जंग हार गया। मंगलवार को उसका शव जसवंतनगर आते ही लोगों का गुस्सा बढ़ गया। आक्रोशित परिजनों तथा ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
सपा नेता शिवपाल सिंह यादव के चुनावी क्षेत्र में 19 को प्राइमरी परगणित पाठशाला के सामने मुख्य मार्ग पर वोट देने गए लोगों की भीड़ को हटाने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया था। इसमें मु.ताजुद्दीन फारुकी (40) पुत्र बदरुद्दीन निवासी मोहल्ला सराय खाम गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे लखनऊ पीजीआई में भर्ती कराया गया। सोमवार दोपहर 12 बजे उसने दम तोड़ दिया।
मृतक के परिजनों ने बताया कि पुलिस के लाठीचार्ज करने से भगदड़ मच गई। सिर में चोट लगने से ताजुद्दीन बुरी तरह घायल हो गया। शिवपाल सिंह यादव ने घायल युवक को लखनऊ इलाज के लिए बुलाया था। मंगलवार को उसका शव कस्बे में पहुंचा तो परिजन और मोहल्ले के लोग पुलिस प्रशासन के खिलाफ आक्रोशित हो उठे। उन्होंने जिलाधिकारी शमीम अहमद को मौके पर बुलाने की मांग की।
एसडीएम हंसराज यादव ने घटना को जानकारी ली। सीडीओ पीके श्रीवास्तव ने पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता और घटना की उच्चस्तरीय जांच कराने, दोषी लोगों को सजा दिलाने का आश्वासन दिया। इसके बाद परिजन शांत हुए और शव को दफनाया गया।