मेरे जुनून का नतीजा जरूर निकेलगा, इसी स्याह समुंदर से नूर निकलेगा...। यह लाइन बर्रा आठ के रहने वाले अवधेश कुमार कौशल पर सटीक बैठती हैं। जिन्होंने अपनी आंखों की रोशनी जाने के बाद भी हार नहीं मानी और पीसीएस की परीक्षा उत्तीर्ण की। अवधेश का चयन जिला दिव्यांग कल्याण अधिकारी के पद पर हुआ है।
मूल रूप से फर्रुखाबाद के गुरसहायगंज निवासी अवधेश कुमार केंद्रीय अरमापुर नंबर दो में जूलॉजी के शिक्षक पद पर हैं। उनको 2016 में इनोवेशन को बढ़ावा देने पर राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी की ओर से सम्मानित भी किया जा चुका हैं।