इस हत्याकांड तह तक जाने के लिए पहले शालू और सुब्रत, फिर विशाल और सुब्रत को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की जाएगी। पुलिस का मकसद हत्या में सुब्रत की भूमिका और तीनों के बीच हुई बातचीत की कड़ियों को जोड़ना है।
पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल के मुताबिक, कारोबारी की हत्या की सुपारी लेने के आरोपी नौकर विशाल के फोन की मई से कॉल डिटेल रिकॉर्ड निकाली गई है। करीब एक हजार पन्नों की कॉल डिटेल में सात नंबर ऐसे मिले हैं, जिन पर पुलिस का विशेष फोकस है।
विशाल से सामना होने पर सुब्रत ने पहचानने से किया था इन्कार
वारदात के बाद जब पहली बार विशाल को सुब्रत के सामने लाया गया था तो उसने उसे पहचानने से इन्कार कर दिया था। पुलिस और अपार्टमेंट से जुड़े लोगों के मुताबिक, यह बात इसलिए सवाल खड़े करती है क्योंकि सुब्रत, शालू और विशाल के पहले साथ घूमने-फिरने और खाना खाने तक जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस अब यह भी जानने का प्रयास कर रही है कि परिचित होने के बावजूद सुब्रत ने विशाल को पहचानने से इन्कार क्यों किया।
हत्या से दो दिन पहले विशाल ने बदला था सिम
पुलिस की जांच में सामने आया है कि पांच सितंबर की रात वारदात को अंजाम दिया गया था, जबकि छह सितंबर की सुबह विनीत का शव मिला था। हत्या से ठीक दो दिन पहले, तीन सितंबर को विशाल ने नया सिम इस्तेमाल करना शुरू किया था।
पार्टी में गए थे सुब्रत, शालू और उनका बेटा
छह सितंबर की सुबह कल्याणपुर स्थित रतन आर्बिट अपार्टमेंट के फ्लैट में विनीत का शव लहूलुहान हालत में मिला था। वारदात के समय सुब्रत अपनी पत्नी शालू और बेटे के साथ पार्टी में गए थे। लौटने पर उन्हें घटना की जानकारी हुई थी।
इसके कुछ ही समय बाद पुलिस ने हाफ एनकाउंटर के बाद सुब्रत के पुराने नौकर विशाल और उसके साथी राजकिशोर को पकड़ लिया था। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में विशाल ने शालू पर विनीत की हत्या की सुपारी देने का आरोप लगाया था। इसके बाद शालू को जेल भेज दिया गया। अब पुलिस सुब्रत की भूमिका को लेकर सामने आए सवालों की भी जांच कर रही है।
वसीयत में बहू शालू का नाम नहीं
जांच में विनीत की करीब चार साल पहले तैयार की गई वसीयत भी सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, वसीयत में बेटे सुब्रत के अलावा बेटी और पत्नी का नाम शामिल है, जबकि बहू शालू का नाम नहीं है। वसीयत में शालू का नाम न होने को भी पुलिस जांच के एक बिंदु के तौर पर देख रही है।