अदालत से फैसला आने के बाद घर लौटे मासूम के बाबा और घर पर मौजूद मां ने कहा कि जिस तकलीफ से मेरी बिटिया गुजरी, उससे कहीं ज्यादा दर्द दरिंदे को मिलना चाहिए। उम्मीद है कि ऊंची अदालतें भी इस फैसले को बरकरार रखेंगी।
अब सिर्फ एक ही इच्छा है- दरिंदे को फांसी के फंदे पर लटकता देखना। दर्दनाक मौत देने वाले को फांसी की सजा ही मिलना चाहिए थी। अदालत ने यह फैसला सुनाकर बिटिया के साथ न्याय किया है। उनका कानून पर विश्वास बढ़ गया है। पुलिस की मदद भी सराहनीय रही।
गांव में गर्माई रही फांसी की सजा
अदालत से रामबहादुर को फांसी की सजा सुनाने के बाद गांव में चर्चा का विषय रहा। हर तरफ फैसले को लेकर चकचक रही। गांव की दुकानों से लेकर घरों और खेतों में भी लोग घटना से संबंधित बातों में मशगूल दिखे।
ग्रामीणों का कहना था कि ऐसा जघन्य अपराध पहले कभी उनके गांव में नहीं हुआ। इस घृणित अपराध के लिए जो सजा दी गई है वह बिल्कुल सही है। जज के फैसले को सुनकर ऐसे कुकृत्य करने से पहले लोग डरेंगे। इस घिनौने अपराध के लिए फांसी की सजा ही होनी चाहिए थी।