एसटीएफ की जांच में खुलासा हुआ है कि विकास दुबे फरीदाबाद से दिल्ली और फिर जयपुर होते हुए उज्जैन पहुंचा था। ये पूरा सफर उसने रोडवेज और निजी बसों के जरिये किया। एसटीएफ ने इस पूरे रूट और संबंधित बस की जानकारी समेत फुटेज भी जुटा लिए हैं।
एसटीएफ के मुताबिक दो जुलाई की रात को आठ पुलिसकर्मियों को मारने के बाद विकास दुबे शिवली गया था। यहां पर वो दिन तक रुका रहा। पांच जुलाई को वो अपने एक दोस्त की मदद से वैन के जरिये औरैया पहुंचा। उसके साथ अमर दुबे और प्रभात मिश्र भी था। यहां से तीनों शाम को ट्रक पकड़कर फरीदाबाद रवाना हुए।
छह जलाई को ये सभी अंकुर के घर पहुंचे। एक रात रुकने के बाद दूसरे दिन यानी सात जुलाई को विकास दिल्ली और अमर दुबे बस से रवाना हुए। विकास दिल्ली से जयपुर और वहां से आठ तारीख को ही उज्जैन पहुंच गया। रात भर शराब कारोबारी के घर रुका।
यहां पर उसने अपने परिचित मंत्री से भी बातचीत की। दूसरे दिन यानी गुरुवार को वो नाटकीय ढंग से महाकाल के मंदिर से गिरफ्तार हो गया। मोबाइल का इस्तेमाल न करने से पुलिस और एसटीएफ उसको ट्रेस नहीं कर पा रही थी।
चश्मा, मास्क और गमछा बना ढाल
एसटीएफ के मुताबिक फरार होने के बाद विकास चश्मा और गमछा बराबर डाले रहा। वहीं मुंह पर मास्क रहा। पीठ पर एक बैग। इस हुलिये के कारण लोग पहचान नहीं सके। न वो किसी से कुछ बोलता था और न ही कोई संदिग्ध हरकत। पूरा सफर वो शांति से करता रहा। लिहाजा किसी को उस पर शक तक नहीं गया।
बस स्टैंड व होटल पर देखी खबर
एसटीएफ की पूछताछ में विकास ने बताया कि उसके पास मोबाइल था नहीं। इसलिए बस स्टैंड या किसी होटल पर खाना खाने के दौरान टीवी पर खबरें देखता था। जिस दिन ये खबर चल रही थी कि वो सबसे बड़ा बदमाश हो गया था, उस दिन उसको यकीन नहीं हो रहा था। वो खुश हो रहा था।