विकास दुबे का बोलबाला इतना था कि जहां आम आदमी उसके खिलाफ सर नहीं उठा पाता था तो वहीं आपूर्ति विभाग भी कभी हिम्मत नहीं जुटा पाया, जिसके चलते बिकरू में विकास दुबे के नौकर दयाशंकर अग्निहोत्री के नाम आवंटित राशन कोटे की दुकान 14 साल पुरानी है।
जांच के दौरान ग्रामीणों से पता चला कि राशन वितरण मनमर्जी से होता था। आपूर्ति निरीक्षक प्रशांत मिश्रा और राजस्व निरीक्षक राम लखन ने ग्रामीणों के बयान दर्ज किए। इस दौरान आपूर्ति विभाग पर लग रहे आरोपों के चलते अधिकारी सफाई देते हुए नजर आए और कहा कि इतने वर्षों में कभी भी इस राशन कोटे की शिकायत ही नहीं की गई तो निरीक्षण भी नहीं हो पाया।
वहीं, गांव वाले ने आरोप लगाते हुए कहा कि आपूर्ति विभाग के अधिकारी विकास दुबे से डरते थे, इसलिए गांव नहीं आते थे। एक बार कोटेदारों की बैठक में आपूर्ति निरीक्षक प्रशांत कुमार ने विकास दुबे के खिलाफ आवाज बुलंद कर दी थी। विकास दुबे व उसके गुर्गों ने जमकर आपूर्ति निरीक्षक की पिटाई कर दी थी, जिसके बाद से फिर कभी किसी की दोबारा हिम्मत नहीं पड़ी कि विकास दुबे के खिलाफ कुछ बोल पाते।