गुरुवार को अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए दिनेश तिवारी व दीपू दुबे को दोष सिद्ध करते हुए पांच-पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। दोनों पर पांच-पांच हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड अदा न करने पर एक-एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। साथ ही आदेश की एक प्रति के साथ दोषसिद्ध अधिपत्र लखनऊ जेल भेजने के आदेश दिए हैं।
विवेचक की मृत्यु हो जाने से दर्ज नहीं हुए थे बयान
मामले में सुनवाई दौरान अदालत में विवेचक की मृत्यु संबंधी रिपोर्ट पेश की गई थी। इससे विवेचक के न तो अदालत में बयान दर्ज हुए और न ही बचाव पक्ष को विवेचना के संबंध में जिरह का मौका मिला। दोषी दिनेश तिवारी के अधिवक्ता सीपी शुक्ला ने बताया कि इस तथ्य को अदालत में रखा गया था, लेकिन अदालत ने इसे नजरअंदाज कर सजा सुनाई। अब इन तथ्यों को हाईकोर्ट के सामने रखते हुए सजा के खिलाफ अपील दाखिल कर जमानत की मांग करेंगे।