पंचायत चुनाव से पहले कानपुर के शहरी और ग्रामीण इलाकों के शस्त्र धारकों का सत्यापन पुलिस के लिए बड़ी चुनौती है। 41 हजार शस्त्र धारकों में सिर्फ 14 हजार का ही सत्यापन हो पाया है। हालांकि पुलिस का दावा है कि चुनाव से पहले सत्यापन का कार्य पूरा कर लिया जाएगा।
इसके लिए लाइसेंस धारकों को नोटिस जारी किया गया है। बिकरू कांड में एसआईटी की रिपोर्ट के बाद डीआईजी ने दोबारा शस्त्र लाइसेंस धारकों का सत्यापन शुरू कराया। इसके लिए सीओ स्वरूप नगर महेंद्र सिंह को नोडल अधिकारी बनाया गया।
एक नोडल के बलबूते 41 हजार शस्त्र धारकों का सत्यापन में मुश्किल हो रही थी। इस वजह से थानेवार एक दरोगा और सहयोग के लिए दो कांस्टेबल को जिम्मेदारी सौंपी गई। सत्यापन के बाद दरोगा रिपोर्ट नोडल अधिकारी को सौंपेंगे। इसके बाद वह एसआईटी प्रभारी को रिपोर्ट सौंपेंगे।
सूत्रों के अनुसार शहर पुलिस ने अब तक 14 हजार शस्त्र धारकों का सत्यापन कर सकी है। इसमें आधा दर्जन से अधिक संदिग्ध मिले हैं। इनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। आईजी मोहित अग्रवाल ने बताया कि 24 अप्रैल से पहले शत प्रतिशत सत्यापन का कार्य पूरा करा लिया जाएगा।
पूरे प्रदेश में लागू हो सकती व्यवस्था
बिकरू कांड के बाद असलहा सत्यापन का यह तरीका फिलहाल कानपुर में ही अपनाया गया है। इसमें सफलता मिलने पर इसका प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जाएगा। इसके बाद यह पूरे प्रदेश में लागू कराई जाएगी, जिससे कि अवैध रूप से शस्त्र लाइसेंस लेने वालों के खिलाफ कार्रवाई हो सके।