बिकरू कांड के बाद दहशतगर्दों के फरार होने में पुलिस की कई बड़ी लापरवाही रही हैं। विकास दुबे, अमर और प्रभात मददगार विष्णु कश्यप के साथ उसके जीजा रामजी के घर तुलसी नगर (रसूलाबाद, कानपुर देहात) पहुंचे थे। यहां पर सभी तीन जुलाई की शाम छह बजे तक रुके थे। इसके ठीक बगल वाले घर में दरोगा समेत चार पुलिस कर्मी भी थे।
निर्माणाधीन थाने के बगल में डाले थे डेरा
मंगलपुर निवासी शुभम पाल ने दो दिनों तक अपने घर पर तीनों दहशतगर्दों को ठहराया था। इसके मकान के पास ही एक नया थाना बन रहा है। यहां पर भी तमाम लोगों की आवाजाही रही, लेकिन किसी को कोई शक नहीं हुआ।
हाईवे पर वाहनों से 80 किलोमीटर का सफर
वारदात को अंजाम देने के बाद तीनों पैदल शिवली नदी पुल तक पहुंचे। यहां से कार से रसूलाबाद पहुंचे। यह दूरी करीब 31 किमी रही। रसूलाबाद से बाइक से करीब 14 किमी दूर झींझक के करियाझाला पहुंचकर पनाह ली। यहां से 35 किमी का सफर कर कार से औरैया पहुंचे। इस तरह बदमाश हाईवे पर निजी कार व बाइक से 80 किमी तक चले थे। इसकी भी पुलिस को भनक तक नहीं लगी।