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Unnao: मार्ग दुर्घटना की एफआईआर में नाम हटाने के लिए रिश्वत लेते दरोगा को विजिलेंस ने रंगे हाथों पकड़ा

Tue, 11 Mar 2025 05:28 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव

सार

पुरवा कोतवाली में तैनात दरोगा पांच हजार रुपये घूस लेते गिरफ्तार किया गया है। मार्ग दुर्घटना के मुकदमे से नाम निकालने के लिए घूस मांगी थी। दरोगा को एंटी करप्शन टीम ने पकड़ा।
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दरोगा को साथ ले गई विजिलेंस - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पुरवा कोतवाली में तैनात एक दरोगा को लखनऊ की एंटी करप्शन टीम ने पांच हजार रुपये घूस लेते गिरफ्तार किया। दरोगा ने भागने की कोशिश भी की लेकिन टीम ने घसीटते हुए जबरन गाड़ी में बैठा लिया। मौरावां थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। दरोगा मार्ग दुर्घटना के मुकदमे में आरोपी का नाम निकालने के बदले घूस ले रहा था।
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अचलगंज थानाक्षेत्र के पड़री कला निवासी मनोज कुमार पांडेय ने आठ मई 2024 को पुरवा कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि बिछिया से लौट रहे पिता नरेंद्र कुमार की साइकिल में वैन ने टक्कर मार दी थी। हादसे में पिता के दोनों पैर और जबड़े में फ्रैक्चर हो गया था। वैन के रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर पुलिस जांच कर रही थी। इसकी विवेचना पुरवा कोतवाली में तैनात दरोगा राजेंद्र सरोज कर रहे थे।
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पुलिस ने टक्कर मारने वाली वैन पंचमखेड़ा गांव निवासी राजबहादुर वर्मा की बताई। इसकी जानकारी होने पर राजबहादुर के बड़े भाई बाेधराज वर्मा ने विवेचक दरोगा राजेंद्र सरोज को बताया था कि उनकी गाड़ी से हादसा नहीं हुआ। एफआईआर दर्ज होने की जानकारी भी तब हुई जब न्यायालय से सितंबर 2024 में बीमा कंपनी को नोटिस भेजा गया।

विवेचक राजेंद्र सरोज ने गाड़ी मालिक राजबहादुर वर्मा का मुकदमे से नाम निकालने और मामले को रफा-दफा करने की बात कहकर पांच हजार रुपये घूस की मांगी की थी। वहीं, पीड़ित ने उनकी वैन से हादसा होने की बात को खारिज करते हुए रुपये देने से इन्कार कर दिया। इसके बाद लखनऊ के एंटी करप्शन कार्यालय पहुंचकर इसकी शिकायत की थी। इसके बाद एंटी करप्शन टीम ने जाल बिछाया और पीडित ने दरोगा से बात की तो उसने कोतवाली के बाहर गुमटी खोले दलीगढ़ीह मोहल्ला निवासी मन्ना को रुपये देने के लिए कहा।
एंटी करप्शन टीम के इंस्पेक्टर टीपी वर्मा के कहने पर मंगलवार को बोधराज ने मंगलवार को दरोगा को रुपये लेने के लिए बुलाया। वहां सादी कपड़ों में मौजूद 12 सदस्यीय टीम ने घूस के रुपये लेते ही दरोगा और दुकानदार को पकड़ लिया। दोनों को मौरावां थाने ले जाया गया, पूछताछ के बाद दुकानदार को छोड़ दिया और दरोगा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर टीम उसे लखनऊ लेकर चली गई।

कोतवाल अमरनाथ यादव ने बताया कि उन्हें घटना के बारे में कोई जानकारी नहीं है। बताया कि मंगलवार को वह रायबरेली एडीजे कोर्ट में एक मुकदमे में गवाही के लिए गए थे। एसपी दीपक भूकर ने घूस लेते गिरफ्तार किए गए राजेंद्र सरोज को निलंबित कर दिया है। उन्होंने बताया कि दरोगा के खिलाफ विभागीय जांच और कार्रवाई भी की जाएगी।
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प्रतापगढ़ दीवान से प्रोन्नत होकर बने थे दरोगा
एंटी करप्शन के हत्थे चढे दरोगा राजेंद्र सरोज मूल रूप से प्रतापगढ़ जिले के थाना अंतू के गांव छतरपुर के रहने वाले हैं। राजेंद्र सरोज 1991 बैच के सिपाही हैं। 2018-19 में दीवान बने, नवंबर 2024 में दरोगा के पद पर प्रोन्नति हुई थी। सितंबर 2021 से पुरवा में तैनात थे, इससे पहले मौरावां में उनकी तैनाती थी।
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