बुंदेलखंड में अब इजराइली तकनीक से सब्जी की खेती होगी। परिस्थितियां अनुकूल न होने के कारण बारिश के मौसम में सब्जी की बुआई से बचते आ रहे यहां के किसानों की इस समस्या को कन्नौज का एक्सीलेंस सेंटर फॉर वेजीटेबल दूर करेगा।
आधुनिक तकनीक की जानकारी के लिए शुक्रवार को 50 किसानों का दल बांदा से यहां पहुंचा। इन्हें सब्जी की पैदावार की बारीकियां समझाई गईं। अब बांदा के किसानों की ओर से डिमांड आने पर सेंटर से दो रुपये के हिसाब से सब्जियों के पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे।
केंद्र प्रभारी दलगंजन सिंह यादव ने शुक्रवार को बांदा से आए किसानों को बताया कि यहां की नर्सरियों से पॉली हाउस और हाइड्रोपोनिक तकनीक से रोपे गए पौधे मिलेंगे। यह पौधे बीमारी रहित होंगे। बीज का जमाव 90 फीसदी तक हो चुका होगा। ऐसे पौधों में बीमारी न के बराबर लगती है।
पैदावार भी बेहतर होती है। रोपाई के 60 दिन बाद ये पौधे फल देने लगेंगे। किसानों को यह फसल अधिक दाम दिलाएगी। पौधे की ड्रिप सिस्टम से सिंचाई, तापमान कम और ज्यादा करने की सुविधा के बीच इन्हें पाली हाउस के अंदर पैदा किया जाता है।
इससे कीट नहीं लगते हैं। पौधे स्वस्थ निकलते हैं। पौधे तैयार करने में मिट्टी के बजाए कोकोपीट, परलाइट, वर्मीकूलाइट पोषक तत्व का प्रयोग किया जाता है। प्रशिक्षण में आए किसानों को सेंटर की ओर से टमाटर, गोभी, मिर्च के पांच-पांच पौधे नि:शुल्क दिए गए।
केंद्र प्रभारी ने बताया कि प्रदेश सरकार राज्य औद्यानिक मिशन के तहत पहले बीज का वितरण करती थी। अब योजना में तब्दीली कर बीज की जगह पौधे देने की तैयारी की है। बांदा के किसानों के साथ यहां के जिला उद्यान अधिकारी परवेज आलम भी मौजूद रहे।