राज्य विश्वविद्यालयों के कुलपतियों का कार्यकाल बढ़ाकर पांच साल करने पर राज्यपाल राम नाईक ने मुहर लगा दी है। साथ ही कहा कि नौ जनवरी तक शासन भी फैसला ले लेगा। अभी कुलपतियों का कार्यकाल तीन साल का है। इस आदेश से यूनिवर्सिटी के कामकाज में तेजी आएगी। शैक्षिक गुणवत्ता बढ़ सकेगी।
राज्यपाल गुरुवार को डीएवी पीजी कॉलेज के कॉमर्स विभाग में आयोजित एक कार्यशाला में हिस्सा लेने पहुंचे। बातचीत में उन्होंने कहा कि कुलपतियों के तीन साल का कार्यकाल पर्याप्ॉत नहीं है। यूनिवर्सिटी का स्ट्रक्चर समझने में छह महीने लगते हैं। छह महीने का कार्यकाल विदाई समारोह में चला जाता है।
दो साल बचते हैं, जिसमें मजबूती से काम नहीं हो पाता। कार्यकाल पांच साल होने के बाद कुलपति ज्यादा प्रभावी तरीके से काम करेंगे। इसी का नतीजा है कि कार्यकाल बढ़ाने पर सहमति बन चुकी है। ऐसा हुआ तो छत्रपति शाहूजी महाराज यूनिवर्सिटी कानपुर समेत यूपी के 14 राज्य विश्वविद्यालयों के कुलपतियों का कार्यकाल बढ़ जाएगा।
राज्यपाल ने यह भी कहा कि राजकीय और अनुदानित डिग्री कॉलेजों के प्रिंसिपल को प्रोफेसर का पदनाम मिलना चाहिए, क्योंकि इससे संबंधित सर्कुलर यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) पहले जारी कर चुका है। अब सरकार भी इस दिशा में काम कर रही है।
अनुदानित डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों की रिटायरमेंट की आयु 65 साल की जानी चाहिए, ताकि डिग्री कॉलेजों से शिक्षकों की कमी दूर हो सके। अभी सेवानिवृत्ति की आयु 62 साल है। राजकीय डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों की सेवानिवृत्त आयु भी बढ़ाकर 62 साल की जानी है। अभी तक 60 साल में सेवानिवृत्त होते हैं।
पीपीपी मॉडल से यूपी में विकास पकड़ेगा जोर
डीएवी कॉलेज के वाणिज्य संकाय की ओर से गुरुवार को ‘भारत में सार्वजनिक-निजी भागीदारी एवं शाश्वत विकास’ विषय पर डीएवी लॉन में सेमिनार हुआ। मुख्य अतिथि राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि पीपीपी मॉडल से सरकार और निजी क्षेत्रों के बीच समन्वय स्थापित होता है। इससे विकास कार्य आसान हो जाते हैं।
आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर बीवी फणी ने कहा कि निजी कंपनियों के शामिल होने से विकास की योजनाओं को पूरा करने में आसानी होती है। सीएसजेएम विश्वविद्यालय के कुलपति जेवी वैशंपायन ने कहा कि सरकार के पास संसाधन और निजी क्षेत्र के पास कुशलता है। इसलिए पीपीपी मॉडल की जरूरत है।
इस मौके पर महापौर जगतवीर सिंह द्रोण, डीएवी कॉलेज की प्राचार्य डॉ. रेखा शर्मा, इंस्टीट्यूट और बिजनेस मैनेजमेंट कानपुर विश्वविद्यालय के निदेशक डॉ. आरसी कटियार, जामिया मिल्लिया इस्लामिया के वाणिज्य संकाय के डीन डॉ. एए अंसारी, डीएवी कॉमर्स विभाग के एचओडी प्रोफेसर एलएन वर्मा ने विचार रखे। डॉ. एनके बाजपेई, डॉ. आरएन त्रिवेदी, डॉ. केके निगम, डॉ. बीके मिश्रा समेत 82 शोधपत्र प्रस्तुत किए गए। डॉ. साधना सिंह और मनोज श्रीवास्तव ने संचालन किया।
देखना चाहता था अटल जी का कॉलेज
कानपुर। राज्यपाल राम नाईक ने अपने संबोधन के दौरान कहा कि,‘ मैं कानपुर 20वीं बार आया हूं लेकिन मुझे इतने दिन बाद डीएवी कॉलेज बुलाया गया। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का कॉलेज देखना चाहता था। ऐसा कॉलेज जहां संयोग से अटल जी और उनके पिता भी पढ़े।
मैं सोचता था कि पता नहीं कब बुलाया जाएगा, जब मुझे यहां का निमंत्रण मिला तो मुझे खुशी हुई। 2019 में यह कॉलेज 100 साल पूरे करेगा। तब तक मैं राज्यपाल रहूंगा, मैं पहले से ही खुद को आमंत्रित मान रहा हूं। राज्यपाल की इन बातों से पूरा पांडाल ठहाकों से गूंज उठा।
राज्यपाल से मिले बीपीएड स्टूडेंट
सीएसजेएम यूनिवर्सिटी से संबद्ध 42 कॉलेजों के 800 बीपीएड स्टूडेंटों की परीक्षा कराने की मांग गुरुवार को राज्यपाल राम नाईक से की गई। वीएसएसडी कॉलेज के स्टूडेंटों ने कहा कि 2014-15 में एडमिशन दिया गया लेकिन अभी तक परीक्षा नहीं कराई जा सकी।
डीएवी कॉलेज में राज्यपाल से मुलाकात की और ज्ञापन देकर कहा कि नेशनल काउंसिल फार टीचर एजूकेशन (एनसीटीई) की नियमावली से एडमिशन लिया गया, फिर भी एग्जाम नहीं कराया जा रहा। स्टूडेंट विनीत यादव, शुभम सिंह, जय गुप्ता, हिमांशी, रूबी पाल और आरती तिवारी ने कहा कि अब स्टूडेंटों का धैर्य टूट रहा है।
114 रिटायर्ड प्रधानाचार्यों का सम्मान
उत्तर प्रदेश प्रधानाचार्य परिषद की ओर से गुरुवार को बीएनएसडी शिक्षा निकेतन इंटर कॉलेज में प्रांतीय प्रतिनिधि सम्मेलन हुआ। इसमें प्रदेश भर के प्रधानाचार्य शामिल हुए। मुख्य अतिथि राज्यपाल राम नाईक ने 114 रिटायर्ड प्रिंसिपलों को सम्मानित किया।
सम्मेलन के माध्यम से की गई तमाम मांगों को राज्यपाल ने मुख्यमंत्री से हल कराने का आश्वासन दिया। राज्यपाल ने कहा प्रिंसिपल शैक्षिक श्रृंखला का महत्वपूर्ण लिंक है। उसके कमजोर होने से श्रृंखला टूट सकती है।
उन्होंने कहा कि यह सच्चाई है कि आज शिक्षा एक है। सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर महंगे निजी शिक्षण संस्थानों की अपेक्षा अच्छा नहीं है। प्रधानाचार्यों को जितने शिक्षकों की जरूरत होती है, सरकार की ओर से मिलती नहीं है।