कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर)
केस 1: वैक्सीन लगवाने के बाद आर्यनगर के राजेश कुमार को बुखार नहीं आया। किसी ने उन्हें बताया कि बुखार न आने का मतलब वैक्सीन ने असर नहीं किया। वह परेशान हैं और दोबारा वैक्सीन लगवाना चाहते हैं। पहले राजेश ने कोविशील्ड लगवाई थी और अब कोवैक्सिन लगवाना चाहते हैं।
केस 2: लाल बंगला के रहने वाले किशोर कुमार को वैक्सीन लगने के बाद कुछ पता नहीं चला। कहते हैं उन्हें जुकाम तक नहीं हुआ। दोनों डोज लगवा ली हैं। अब लोग कह रहे हैं कि बुखार आना चाहिए। वह क्षेत्रीय डॉक्टर से दोबारा वैक्सीन लगवाने के लिए मशविरा लेने पहुंचे तो डॉक्टर ने मना कर दिया।
ये दो मामले तो उदाहरण के लिए हैं, लेकिन ऐसे बहुत से लोग हैं जिन्हें वैक्सीन लगवाने से कोई फर्क नहीं पड़ा। विशेषज्ञों ने बताया कि कोरोना संक्रमितों में सिर्फ 15 फीसदी को ही अस्पताल जाने की नौबत आई है। बहुत से लोगों के अंदर लक्षण नहीं उभरे। उनके अंदर एंटीबॉडी बन गई। अगर वह वैक्सीन लगवा भी लेते हैं तो नुकसान नहीं, फायदा ही होगा।
इस संबंध में होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज के सेवानिवृत्त चिकित्सा शिक्षक डॉ. जीडी शुक्ल का कहना है कि वैक्सीन लगाने के पहले एंटीबॉडी टेस्ट कर लिया जाए। शरीर में पहले से एंटीबॉडी रहने से वैक्सीन लगवाने में कोई दिक्कत नहीं होती है।
ऐसे में वैक्सीन देना व्यर्थ है। इस पर अपर निदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डॉ. जीके मिश्रा का कहना है कि अगर किसी के शरीर में एंटी बॉडी है तो भी उसे वैक्सीन लगा लेना चाहिए। हर व्यक्ति एंटीबॉडी टेस्ट नहीं करा सकता।
वहीं, कोवैक्सिन ट्रायल के चीफ इन्वेस्टीगेटर डॉ. जेएस कुशवाहा का कहना है कि किसी प्रकार का भ्रम न पालें। वैक्सीन लगवाएं एंटी बॉडी है तो भी और नहीं है तब भी। वैक्सीन से फायदा होगा।