उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड (यूपीएसआईडीसी) में आयकर विभाग ने 50 लाख से अधिक की टैक्स चोरी पकड़ी है। पांच महीने से टीडीएस (टैक्स डिडक्शन एट सोर्स) नहीं जमा किया जा रहा था। इसी तरह यूपीएसआईडीसी के भूखंडों में मिट्टी की खुदाई से मिलने वाली रॉयल्टी पर टीसीएस (टैक्स कलेक्शन एट सोर्स) भी जमा नहीं किया जा रहा था। टीसीएस की रकम बीते सात साल में मिली रॉयल्टी की रकम की गणना कर निकाली जाएगी। माना जा रहा है कि यह रकम भी 25 लाख रुपये से कम नहीं है।
आयकर आयुक्त (टीडीएस) एके त्रिपाठी के निर्देश पर अपर आयुक्त संजय सिन्हा, उपायुक्त एके भाटिया, आयकर अधिकारी अनुराग वाजपेयी, डीके पांडेय, सुनील कुमार, एसके निगम, प्रणवीर सिंह, अवधेश गुप्ता की टीम ने बुधवार को लखनपुर स्थित यूपीएसआईडीसी के मुख्यालय पर धावा बोला। अधिकारियों ने यहां एमडी, चीफ इंजीनियर, वित्त नियंत्रक समेत विभिन्न खंडों और कार्यालयों में दस्तोवजों की जांच की।
पता चला कि पांच माह से यहां करीब 50 लाख रुपये का टीडीएस जमा नहीं हुआ। विभागीय अफसरों ने आयकर अफसरों को इस अनियमितता के पीछे यूपीएसआईडीसी में आला अफसरों के बीच खींचतान का नतीजा बताया। आयकर अफसरों ने टीडीएस कटौती में लापरवाही पर जवाब तलब किया है। इसी तरह से यहां फार्म-16 में भी गड़बड़झाला सामने आया। सभी कर्मचारियों के फार्म-16 मैनुअली ही भरे जे रहे थे।
सात साल की रॉयल्टी का देना होगा हिसाब
यूपीएसआईडीसी भूखंडों की मिट्टी बेचकर रॉयल्टी से अपनी झोली भर रहा था, लेकिन आय के स्रोत पर होने वाली कर कटौती आयकर विभाग में नहीं जमा करा रहा था। दस्तावेजों की जांच के दौरान यह बात आयकर अफसरों के सामने आई। इसी वित्तीय वर्ष में करीब सवा करोड़ रुपये की रॉयल्टी हासिल करने के सबूत मिले हैं। यूपीएसआईडीसी को अब सात तक की रॉयल्टी का हिसाब देना होगा। इसके बाद इसमें से टीसीएस की कटौती होगी।