सपा का पीडीए भाजपा की नई कार्यकारिणी में दिखा हावी
भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी को लेकर राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि इसमें समाजवादी पार्टी के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले का प्रभाव दिखाई दे रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि अन्य पिछड़ा वर्ग के 50 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं को ध्यान में रखते हुए भाजपा ने नई टीम में ओबीसी और एससी वर्ग को अधिक प्रतिनिधित्व दिया है। पार्टी के अंदर भी यह चर्चा है कि यह रणनीति आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर बनाई गई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह सामाजिक समीकरण भाजपा के लिए कितना कारगर साबित होता है।
सपा का झूठ बेनकाब करेंगे, प्रदेश भर के पिछड़ों को संगठित करेंगे
भाजपा पिछड़ा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष बनाएगए प्रकाश पाल ने कहा कि पार्टी नेतृत्व ने जो जिम्मेदारी दी है वह उसके लिए आभारी हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग के 50 प्रतिशत से अधिक मतदाता हैं और उन्हें एकजुट करना प्राथमिक लक्ष्य होगा। वे सपा के पीडीए के कथित झूठ को जनता के बीच उजागर करेंगे और यह समझाएंगे कि पिछड़ों, अगड़ों, दलितों, शोषितों और वंचितों का वास्तविक हित भाजपा में ही सुरक्षित है।
कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र में कानपुर का दबदबा कम हुआ
भाजपा के संगठनात्मक ढांचे में एक बड़ा बदलाव यह भी देखने को मिला है कि लंबे समय बाद कानपुर का दबदबा क्षेत्रीय नेतृत्व में कम हुआ है। अब कमान बुंदेलखंड क्षेत्र की ओर स्थानांतरित हो गई है। रामकिशोर साहू से पहले इस क्षेत्र की जिम्मेदारी कानपुर के प्रकाश पाल, मानवेंद्र सिंह और बालचंद्र मिश्रा जैसे नेताओं के पास रही थी।