यूपीसीडा में हुए 2.11 करोड़ के घोटाले के मामले में पुलिस की जांच में कई बड़े खुलासे हुए हैं। विभागीय जांच में आरोपी प्रधान महाप्रबंधक अरुण कुमार मिश्रा पर अफसरों ने मेहरबानी की। बचाने के इरादे से ही आठ साल से जांच को अधर में अटकाए हुए हैं। अभी तक जांच में अरुण को दोषी तक नहीं ठहराया।
पुलिस ने इन सभी बिंदुओं पर तफ्तीश की तो कई सवालों के जवाब विभागीय अफसरों ने नहीं दिए। कोर्ट में दाखिल की गई चार्जशीट में इन सभी बिंदुओं का जिक्र है। पाली-चकेरी सड़क का निर्माण पीडब्ल्यूडी ने कराया था। फर्जीवाड़ा कर इस सड़क को कागज में यूपीसीडा द्वारा बना दिखाकर 2.11 करोड़ का भुगतान करा लिया।
इसमें अरुण मिश्रा की अहम भूमिका सामने आई थी। यह मामला 2012 का है। यूपीसीडा ने कंसल्टेंट दिनेश्वर दयाल से जांच कराई। इसके आधार पर केस दर्ज कराया। इसमें अधिशासी अभियंता अजीत सिंह, सहायक अभियंता नागेंद्र सिंह, अवर अभियंता एके वर्मा व ठेकेदार सतीश को आरोपी बनाया गया था।