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यूपीसीडा घोटाला: विभागीय जांच में अरुण पर मेहरबानी, न जांच पूरी हुई न आरोपी बनाया

Sun, 22 Nov 2020 03:03 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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घोटाला - फोटो : amar ujala
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यूपीसीडा में हुए 2.11 करोड़ के घोटाले के मामले में पुलिस की जांच में कई बड़े खुलासे हुए हैं। विभागीय जांच में आरोपी प्रधान महाप्रबंधक अरुण कुमार मिश्रा पर अफसरों ने मेहरबानी की। बचाने के इरादे से ही आठ साल से जांच को अधर में अटकाए हुए हैं। अभी तक जांच में अरुण को दोषी तक नहीं ठहराया।
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पुलिस ने इन सभी बिंदुओं पर तफ्तीश की तो कई सवालों के जवाब विभागीय अफसरों ने नहीं दिए। कोर्ट में दाखिल की गई चार्जशीट में इन सभी बिंदुओं का जिक्र है। पाली-चकेरी सड़क का निर्माण पीडब्ल्यूडी ने कराया था। फर्जीवाड़ा कर इस सड़क को कागज में यूपीसीडा द्वारा बना दिखाकर 2.11 करोड़ का भुगतान करा लिया।

इसमें अरुण मिश्रा की अहम भूमिका सामने आई थी। यह मामला 2012 का है। यूपीसीडा ने कंसल्टेंट दिनेश्वर दयाल से जांच कराई। इसके आधार पर केस दर्ज कराया। इसमें अधिशासी अभियंता अजीत सिंह, सहायक अभियंता नागेंद्र सिंह, अवर अभियंता एके वर्मा व ठेकेदार सतीश को आरोपी बनाया गया था।
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इस जांच से अरुण कुमार मिश्रा का नाम बाहर था। वहीं तत्काल एक विभागीय जांच शुरू की गई थी। इधर पुलिस ने मामले में इन चारों आरोपियों के अलावा अरुण मिश्रा को भी आरोपी बनाया। जांच पूरी कर जेल भी भेज दिया। मगर अब तक यूपीसीडा की विभागीय जांच पूरी नहीं हो सकी है। इसलिए पुलिस ने अपनी जांच के दौरान इस पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

फंस सकते हैं कई और भी अफसर
पुलिस ने फिलहाल पांच आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट लगा दी है। जांच के दौरान पुलिस ने यूपीसीडा से कई अहम जानकारियां मांगी थीं। इस बारे में कई जानकारियां उपलब्ध नहीं कराई गईं। इसमें अरुण मिश्र से संबंधित भी जानकारियां हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक ये इसलिए क्योंकि अगर वो जानकारी मिल जाए तो कई और अफसर जांच के घेरे में आएंगे। यही नहीं पुलिस अभी अपने स्तर से साक्ष्य जुटा रही है। अगर साक्ष्य मिले तो आगे भी कार्रवाई हो सकती है।

सैलरी पूरी मिलती रही, तैनाती का पता नहीं
2018 से अरुण मिश्रा निलंबित चल रहा था। विभाग के मुताबिक वो मुख्यालय से संबद्ध था। जांच में पुलिस को बताया गया कि वो फैजाबाद से संबद्ध है। हालांकि इसके पुख्ता साक्ष्य नहीं मिल सके। ताकि ये स्पष्ट हो सके कि आखिर निलंबन के बाद से वो कहां संबद्ध था और सैलरी कैसे मिल रही थी। निलंबन के दौरान भी उसे पूरी सैलरी मिल रही थी।  
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