कानपुर। उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (यूपीसीए) की बुधवार को हुई वार्षिक आमसभा (एजीएम) में बीसीसीआई उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला के हस्तक्षेप से विवाद की स्थिति टल गई। दरअसल गाजियाबाद के उपाध्यक्ष राकेश मिश्रा ने नाराजगी जताते हुए एडवाइजरी कमेटी पर सवाल उठाए थे। सदस्यों ने उन्हें संघ से हटाने का प्रस्ताव सदन में रख दिया। कार्रवाई से पहले ही राजीव शुक्ला ने मामला शांत कराया।
एजीएम से पहले ही यूपीसीए की विभिन्न समितियों के गठन पर दोबारा विचार करने का फैसला लिया गया था। इसी के चलते बैठक में समितियों के गठन को फिलहाल टाल दिया गया था। सूत्रों के मुताबिक इस पर उपाध्यक्ष राकेश मिश्रा ने आपत्ति जताते हुए क्रिकेट एडवाइजरी कमेटी के गठन पर सवाल उठाए। उन्होंने यूपीसीए के संविधान और नियमों को लेकर भी कई आपत्तियां दर्ज कराईं। कंपनी सेक्रेटरी की ओर से नियमों की स्थिति स्पष्ट किए जाने के बावजूद बहस जारी रही।
मामला तब और गरमा गया जब संयुक्त सचिव डॉ. उमेर हसन ने राकेश के विरोध के तरीके पर सवाल उठाते हुए यूपीसीए पदाधिकारियों के खिलाफ दर्ज मुकदमों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि इन मुकदमों के चलते उन्हें भी नियमित रूप से हाईकोर्ट की तारीखों में जाना पड़ता है। दोनों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई।
राकेश ने यूपीसीए से अपने पुराने जुड़ाव का हवाला देते हुए मौजूदा पदाधिकारियों को नया बताते हुए टिप्पणी की। डॉ. उमेर हसन ने भी जवाब दिया। बढ़ती तनातनी के बीच अध्यक्ष डॉ. निधिपति सिंहानिया ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि संगठन के पदाधिकारियों के खिलाफ मुकदमे करने वाले व्यक्ति को संघ में रखने की जरूरत नहीं है। सदन में राकेश मिश्रा को हटाने का प्रस्ताव रखा गया, जिसे ध्वनि मत से समर्थन मिला।
इस बीच राजीव शुक्ला ने हस्तक्षेप किया। बातचीत के बाद टकराव को खत्म करने के लिए मुकदमों को वापस लेने पर सहमति बनी। राकेश मिश्रा को तत्काल हटाने की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी और विवाद को शांत कराया गया।