पांडेय के अनुसार इसकी बड़ी वजह जलवायु परिवर्तन है। आने वाले समय में इस परिवर्तन का असर और ज्यादा दिखेगा। बताया कि अभी तक नीरू चक्रवात का असर पूर्वी उत्तर प्रदेश से लेकर सिर्फ कानपुर क्षेत्र तक सीमित था लेकिन अब यह आगरा, दिल्ली, उत्तराखंड, महाराष्ट्र और गुजरात सहित कई अन्य राज्यों की ओर बढ़ रहा है। 14 अक्तूबर के बाद जिस तरह की परिस्थितियां होगी, उसके आधार पर यह बताया जा सकेगा कि मानसून की विदाई कब तक होगी।
पूर्वानुमान को लेकर असमंजस
जलवायु परिवर्तन की बढ़ती स्थिति को देखते हुए मौसम विशेषज्ञों में पूर्वानुमान को लेकर असमंजस की स्थिति बनती जा रही है। स्थानीय मौसम विभाग के प्रमुख डॉ. एसएन पांडेय के अनुसार जिस तरह से मौसम में जल्दी-जल्दी बदलाव हो रहा है, उससे सटीक पूर्वानुमान लगा पाना मुश्किल हो रहा है। सटीक भविष्यवाणी के लिए ब्लॉक स्तर पर मौसम की जानकारी देने वाले संयंत्र लगाने की जरूरत पड़ने लगी है। उसी के आधार पर पूर्वानुमान सहीं हो पाएगा।
शनिवार को तापमान
अधिकतम- 28.6, न्यूनतम- 22.4 डिग्री सेल्सियस
सापेक्ष आर्द्रता
अधिकतम- 95, न्यूनतम- 78 प्रतिशत