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यूपी: सबसे बड़े फर्जी लाइसेंस घोटाले का खुलासा, 90 असलहा लाइसेंस फर्जी और 73 की किताब भी हो गई जारी

Tue, 20 Aug 2019 11:39 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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कानपुर डीएम विजय विश्वास पंत एवं सीडीओ अक्षय त्रिपाठी - फोटो : अमर उजाला
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कानपुर में असलहा लाइसेंस फर्जीवाड़े की जांच में 90 लाइसेंस फर्जी पाए गए हैं। इनमें से 73 फर्जी लाइसेंसों पर किताब भी जारी कर दी गई है। अब तक यह प्रदेश का सबसे बड़ा फर्जी लाइसेंस घोटाला माना जा रहा है। मामला खुलने से 17 लाइसेंसों की किताब जारी नहीं हो पाई है।
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मंगलवार को जिलाधिकारी विजय विश्वास पंत और जांच अधिकारी सीडीओ अक्षय त्रिपाठी ने यह ब्योरा जारी कर बताया कि सभी फर्जी लाइसेंस निरस्त होंगे। साथ ही लाइसेंस हासिल करने वालों के खिलाफ आर्म्स एक्ट में मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। फर्जीवाड़े से जुड़े अन्य घटकों के खिलाफ भी कार्रवाई होगी।

डीएम विजय विश्वास पंत और सीडीओ अक्षय त्रिपाठी ने जांच का पहला चरण पूरा होने पर कलक्ट्रेट में पत्रकारों से बात की। बताया कि असलहा लाइसेंस दो चरणों में बनता है। एक में लाइसेंस की मंजूरी ली जाती है और दूसरे में स्वीकृत लाइसेंस की फाइल पर किताब जारी होती है। पहले चरण से जुड़े स्टाफ के बयान हो गए हैं।

वहां स्थिति स्पष्ट है। अब लाइसेंस किताब जारी करने वाले स्टाफ के बयान होने हैं। लिपिक विनीत चतुर्वेदी जिनके पास चार्ज रहा है, वह अस्पताल में हैं। डॉक्टरों से सलाह करके उनके बयान लिए जाएंगे। इससे स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। लिपिक की अलमारी सील कर दी गई है।

 

एक-दो दिन में सील तुड़वाकर इन्वेंटरी (दस्तावेजों की सूची) तैयार की जाएगी। किताब जारी करने वाले रिकार्ड की एक ही फाइल की जांच से गड़बड़ी किसकी है? यह स्पष्ट हो जाएगा। अभी जो फाइलें बाहर हैं, उनके रिकॉर्ड तैयार किए जा रहे हैं। अधिकारियों ने यह भी कहा कि रिपोर्ट आने पर संख्या बढ़ भी सकती है।

जांच के बाद बदलेगा असलहा विभाग का स्टाफ
जांच अधिकारी सीडीओ ने बताया कि रजिस्टर पर सिटी मजिस्ट्रेट के दस्तखत हैं। उनके भी बयान लिए गए हैं। सिटी मजिस्ट्रेट का कहना है कि उन्होंने फाइल देखकर ही किताब जारी की है। उस फाइल की जांच करने पर पता चलेगा कि इसमें फर्जीवाड़ा कैसे किया गया।

 

अभी जांच में चार लोगों के लाइसेंस में फर्जी स्वीकृति पाई गई है। डीएम ने बताया कि अभी सभी शक के दायरे में हैं, जो भी दोषी मिलेगा उसके खिलाफ एफआईआर होगी। जांच पूरी होने के बाद असलहा विभाग का पूरा स्टाफ बदला जाएगा। सत्ताधारियों के दबाव में लाइसेंस जारी करने के सवाल डीएम ने कहा कि जरूरतमंद को ही लाइसेंस दिए गए।

विरासत प्रकरण में दो लिपिकों के खिलाफ आरोप पत्र
नौबस्ता की संध्या सिंह के विरासत के तीन लाइसेंस हस्तांतरण के मामले में असलहा विभाग के दो लिपिकों के खिलाफ आरोप पत्र तैयार किए जा रहे हैं। डीएम ने बताया कि इस मामले में कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो गई है। बता दें कि जीवित हस्तांतरण के मामले में फर्जीवाड़ा मिला था। इसमें जिसके नाम के लाइसेंस हस्तांतरित किए जा रहे थे, उसकी मूल पत्रावली ही नहीं थी।

 
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कारीगर के खिलाफ भी होगी एफआईआर
असलहा बाबू विनीत से जुड़े कारीगर के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। डीएम ने बताया कि जांच रिपोर्ट आने के बाद कारीगर के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

फजीवाड़े पर जांच समिति का नजरिया
- बिना लाइसेंस सीधे किताब जारी कर दी गई।
- डीएम के जाली दस्तखत से फर्जी फाइल बनाकर लाइसेंस स्वीकृत दिखाया गया।
- डीएम के दस्तखत को स्कैन करके फर्जीवाड़ा किया गया।

एक जुलाई 2018 से अब तक स्थिति
कुल 431 लाइलेंस चढ़े हैं।
180 लाइसेंस नए हैं।
78 लाइसेंस वारिसान के हैं।
84 लाइसेंस जीवित हस्तांतरण के हैं।
89 लाइसेंस पंजीकरण के।
90 फर्जी हैं नए लाइसेंस में। इनमें से 73 की किताब जारी, 17 बाकी।
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