दिवाली पर अपनों के बीच पहुंचकर खुशियों के दीप जलाने की चाह रखने वाले यात्रियों के लिए घर की राह आसान नहीं रह गई है। ट्रेनों में सीटों की भारी किल्लत और जनरल कोच में भीड़ ने सफर को मुश्किल बना दिया है। हालात ऐसे हैं कि 15 घंटे में पूरा होने वाला सफर 40 घंटे तक खिंच रहा है। दिल्ली और बिहार से सात, आठ और नौ नवंबर को कंफर्म टिकट मिलना मुश्किल हो गया है। वहीं मुंबई और बंगलूरू से आने वाली ट्रेनों में वेटिंग टिकट के लिए भी मारामारी है। ऐसे में यात्रियों को तीन-तीन ट्रेनें बदलकर घर पहुंचना पड़ रहा है।
दिवाली रविवार को और इसके बाद भाईदूज है। ऐसे में दूसरे शहरों में नौकरी और कारोबार करने वाले लोग परिवार के साथ त्योहार मनाने के लिए अतिरिक्त छुट्टी लेकर निकले हैं। लेकिन ट्रेनों में जगह नहीं मिलने से उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं। विशेष ट्रेनों के संचालन के बावजूद नियमित ट्रेनों में यात्रियों का दबाव कम नहीं हो रहा है। ट्रेनों में भीड़ के बीच जनरल कोच की सीटों पर कब्जे की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। यात्रियों का आरोप है कि सीमांचल एक्सप्रेस में साइड पैंट्री कार में काम करने वाले कुछ लोग जनरल कोच की सीटों पर कब्जा कर लेते हैं।