फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

UP: मार्च में पहली बार दिसंबर-जनवरी जैसी धुंध, तेजी से बढ़ते तापमान के बीच बदलाव; पर्यावरण विशेषज्ञ भी हैरान

Wed, 11 Mar 2026 09:20 AM IST
Sharukh Khan अभिषेक द्विवेदी, अमर उजाला, कन्नौज

सार

पहली बार मार्च में कोहरा देखा गया। दिसंबर और जनवरी जैसी धुंध रही। मौसम विभाग ने इसे क्लाइमेट इमरजेंसी बताया। जलवायु परिवर्तन के संकेत हैं। यह अभूतपूर्व बदलाव पर्यावरण विशेषज्ञों के लिए अध्ययन का विषय बना है। कानपुर मंडल समेत यूपी के कई जिलों में मंगलवार की सुबह कोहरे की घनी चादर छाई रही।
विज्ञापन
weather update - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पहली बार मार्च में घना कोहरा पड़ा है, इसने पर्यावरण विशेषज्ञों को हैरत में डाल दिया है। मौसम विभाग ने इस अभूतपूर्व घटना को जलवायु आपातकाल (क्लाइमेट इमरजेंसी) नाम देते हुए जलवायु परिवर्तन का स्पष्ट संकेत दिया है। 
विज्ञापन


उनका कहना है कि यदि तापमान में इसी तरह का अनिश्चित बदलाव जारी रहा, तो बेमौसम बरसात, ओलावृष्टि और अब बेमौसम कोहरा प्रभाव डालेगा। मंगलवार की सुबह वह नजारा दिखा जो आमतौर पर दिसंबर या जनवरी की कड़कड़ाती ठंड में दिखता है। 

मार्च के महीने में पहली बार सफेद धुंध छा गई, जिसने दृश्यता (विजिबिलिटी) को महज 25 मीटर तक समेट दिया। इत्रनगरी ही नहीं कानपुर मंडल के सभी जिलों समेत बुंदेलखंड के कई इलाकों में सुबह 11 बजे तक कोहरे की सफेद चादर छाई रही और एक्सप्रेसवे व हाईवे पर वाहन रेंगते नजर आए। 
विज्ञापन

 

जलाशयों या नदियों के किनारे शून्य रही दृश्यता
जलाशयों या नदियों के किनारे तो दृश्यता शून्य रही। इस अनोखी घटना को ग्लोबल वार्मिंग से जोड़कर देखा जा रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक डॉ. अमरेंद्र कुमार ने बताया कि यह कोई सामान्य मौसमी घटना नहीं बल्कि जलवायु परिवर्तन (क्लाइमेट चेंज) का एक गंभीर और स्पष्ट संकेत है। 

 

हर दिन बढ़ रहा तापमान
उन्होंने बताया कि इस बार फरवरी के अंत से ही तापमान में अप्रत्याशित बढ़ोतरी देखी गई। एक मार्च से तापमान हर दिन औसतन 2 डिग्री सेल्सियस की दर से बढ़ रहा था। इस अत्यधिक गर्मी के कारण पृथ्वी की ऊपरी सतह बहुत गर्म हो गई थी। 
 

सोमवार की रात अचानक हवा में नमी बढ़ी और तापमान एकाएक छह डिग्री नीचे गिर गया।पृथ्वी जिस तेजी से गर्म हुई, उतनी ही तेजी से उसने अपनी गर्मी छोड़ी। जब यह गर्म सतह अचानक ठंडी हुई और हवा की नमी से मिली, तो वह रेडिएशन फॉग में तब्दील हो गई। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने इस दुर्लभ घटना को इसी नाम से दर्ज किया है, जिसे क्लाइमेट इमरजेंसी की संज्ञा दी गई है।

पर्यावरण के लिए खतरे की घंटीइतिहास में मार्च के महीने में इस तरह का घना कोहरा पहले कभी दर्ज नहीं किया गया। यह असामान्य घटना बताती है कि हमारा ईकोसिस्टम असंतुलित हो रहा है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण तापमान में आने वाले ये उतार-चढ़ाव भविष्य में खेती, स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं। सूरज चढ़ने के साथ कोहरा छंट तो गया है लेकिन यह अपने पीछे जलवायु संरक्षण के लिए कई गहरे सवाल छोड़ गया है। -डॉ. बबिता यादव, पर्यावरणविद्

 
विज्ञापन

यह असामान्य घटना है, जो जलवायु परिवर्तन का संकेत देती है। सुबह भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) को पूरी रिपोर्ट बनाकर भेज दी थी। इसे क्लाइमेट इमरजेंसी का नाम दिया गया है, जिस पर अध्ययन किया जा रहा है। यह रेडिएशन फॉग आने वाले दिनों में भी दिखाई देगा।-डॉ. अमरेंद्र कुमार, वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें