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UP: मुश्किल हो सकता है राजनीतिक दलों को दान देकर टैक्स बचाना, 5 हजार करोड़ आयकर चोरी का खुलासा; बदलेगी धारा!

Thu, 30 Jan 2025 10:44 AM IST
शाहरुख खान अमित अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर

सार

Union Budget 2025: अब राजनीतिक दलों को दान देकर टैक्स बचाना मुश्किल हो सकता है। नाम के राजनीतिक दलों के जरिये पांच हजार करोड़ की आयकर चोरी की गई। आयकर अधिनियम की धारा 80 जीजीसी के अनुचित लाभ का विभाग को पता चला है। दो साल से विभाग जांच कर रहा है।
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Income tax - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Income tax fraud India: निष्क्रिय राजनीतिक दलों और चुनावी ट्रस्टों के जरिये करीब पांच हजार करोड़ की आयकर चोरी का खुलासा हुआ है। आयकर अधिनियम की धारा 80 जीजीसी का अनुचित उपयोग करके इतनी बड़ी कर चोरी की गई। 
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अब एक फरवरी को आने वाले प्रस्तावित बजट में इस धारा में बदलाव हो सकता है या इसे खत्म किया जा सकता है। इस धारा का अनुचित लाभ लेने वालों को नोटिस भेजे गए हैं। धारा में बदलाव होने पर दान देकर टैक्स बचाना कंपनियों के लिए मुश्किल हो जाएगा।

विभाग को दो साल पहले तमिलनाडु में पहला मामला पता चला था। इसके बाद केस स्टडी के तौर पर इसे लेकर जांच कराई गई तो कर चोरी की परतें खुलती चली गईं। कर चोरी में नौकरीपेशा से लेकर कारोबारी शामिल हैं। 
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सीए पुलकित माहेश्वरी ने बताया कि आयकर अधिनियम 1961 की धारा 80 जीजीसी के तहत, राजनीतिक दलों या चुनावी ट्रस्ट को किए गए योगदान पर कर कटौती का दावा किया जाता है। इसके तहत कोई व्यक्ति इस कटौती का दावा कर सकता है। 

कंपनियां, फर्म और अन्य संस्थाएं धारा 80 जीजीबी के तहत दावा कर सकती हैं। चेक, ड्राफ्ट, इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसफर के जरिये भुगतान किया जाता है। खास बात यह है कि इस कटौती के लिए अधिकतम कोई सीमा नहीं है। 

जितनी राशि निष्क्रिय राजनीतिक दल या चुनावी ट्रस्ट को दी जाती है, उसका 100 प्रतिशत दावा किया जा सकता है। विभाग के सूत्रों ने बताया कि तमिलनाडु की एक राजनीतिक पार्टी को हुए भुगतान, कई नौकरीपेशा और कारोबारियों की ओर से रिफंड का दावा आने के बाद जांच शुरू हुई। 

 

जांच में पता चला कि राजनीतिक दल केवल कागजों में पंजीकृत था और उसकी राजनीतिक हिस्सेदारी चुनावों में शून्य थी। जांच की गई तो पता चला कि दल को करोड़ों रुपये चंदे के रूप मिले थे। 

 

इसके बाद कानपुर रीजन समेत देश भर के 18 रीजन में एआई और विभागीय डाटा विश्लेषण के जरिये कर चोरी की जानकारी हुई। सूत्रों ने बताया कि कानपुर रीजन के अलावा नोएडा, गाजियाबाद में इस तरह के मामले पकड़े गए हैं।

धारा में बदलाव से दान देकर टैक्स बचाना होगा मुश्किल
राजनीतिक फंडिंग में पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए यह व्यवस्था की गई थी। इसके जरिये भी कर चोरी की जा रही है। कानपुर रीजन में नौकरीपेशा और कारोबारियों को नोटिस जारी किए गए हैं। प्रस्तावित बजट में धारा में बदलाव हुआ तो कंपनियों के लिए दान देकर टैक्स बचाना मुश्किल हो सकता है। -आशीष गुप्ता, वरिष्ठ कर अधिवक्ता

व्यक्तिगत रिफंड के मामले ज्यादा आने पर विभाग हुआ सक्रिय
दरअसल बड़ी-बड़ी कंपनियों में काम करने वाले नौकरीपेशा इस धारा के तहत रिफंड के लिए विभाग में दावा कर रहे थे। व्यक्तिगत के बड़े पैमाने पर दावा आने के बाद विभाग सक्रिय हुआ। अमूमन इस तरह के दावे कम आते थे, लेकिन संख्या अचानक बढ़ने पर आंतरिक निगरानी शुरू की। सूत्रों ने बताया कि यदि कोई 10 लाख रुपये इन्हें देता था तो बाद में तीन से चार प्रतिशत रकम देकर अन्य रकम नकद में ले लेता था। राजनीतिक दल चुनावी खर्च के नाम पर ये रकम बैंक खाते से निकाल लेते थे।
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700 राजनीतिक दलों-ट्रस्टों का चला पता
जो लोग मानते हैं कि देश में केवल कुछ ही राजनीतिक दल या ट्रस्ट हैं तो यह जानकारी गलत है। आयकर विभाग को जांच में 700 के करीब राजनीतिक दलों व ट्रस्टों का पता चला है। ऐसे भी राजनीतिक दलों का पता चला जो केवल एक कमरे में ही संचालित हो रहे थे, लेकिन चुनावी चंदा खूब आ रहा था। इतनी बड़ी कर चोरी का खुलासा होने के बाद आने वाले बजट में इसे रोकने के सख्त प्रावधान होने की संभावना है। दरअसल विभाग की ओर से इस तरह से की जा रही कर चोरी की पूरी जानकारी वित्त मंत्रालय को दी गई है।
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