होली में मिलावट खोर सक्रिय हो गए हैं। पिछले वर्षों में जांच में महानगर में खोया में रिफाइंड आयल, खड़िया पाउडर और मिल्क पाउडर की मिलावट पाई गई थी। इस बार भी बड़े पैमाने पर मिलावटी खाेया का कारोबार चल रहा है। एक दिन पहले ही 54 लाख से रुपये का मिलावट खाद्य पदार्थ पकड़ा गया। खाद्य विभाग के आयुक्त संजय प्रताप सिंह ने बताया कि मिलावटी खाद्य पदार्थों के खिलाफ टीम बनाकर जांच कराई जा रही है।
विज्ञापन
महानगर में इटावा, औरैया, हमीरपुर, घाटमपुर, फर्रुखाबाद से ट्रेनों और बसों लाया जाता है। कानपुर में हटिया और फजलगंज खोया मंडी बड़ी मानी जाती हैं। वहीं, दुकानों पर बिकने वाला खोया दुकानदार अपने तरीके से बनाकर और मंगाकर बेचते हैं। पता चला है कि इस बार भी बड़ी मात्रा में मिलावटी खोया तैयार किया जा रहा है। कलक्टरगंज की खोया मंडी में 300 से 430 रुपये किलो तक बिक रहे खोया की गुणवत्ता भी जांच के दायरे में है।
खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में संकेत मिले हैं कि कुछ दुकानों पर कचरी को आकर्षक बनाने के लिए ऐसे रंगों का प्रयोग किया जा रहा है जो खाद्य मानकों के अनुरूप नहीं हैं। देखने में चमकदार और सुंदर लगने वाली यह कचरी सेहत पर असर डाल सकती है। चिकित्सकों के अनुसार ऐसे रंग पेट और त्वचा संबंधी समस्याएं बढ़ा सकते हैं। खाद्य विभाग का मानक है कि कचरी और चिप्स जैसे खाद्य पदार्थों में रंग की मात्रा 100 पीपीएम होनी चाहिए। एक पीपीएम का अर्थ है किसी पदार्थ का एक भाग पानी के दस लाख भागों में मिलाना। इसी तरह रमजान में बड़ी संख्या में एक्सपाइरी खजूर पाया गया है। खाद्य विभाग के अनुसार, खजूर का काराेबार करने वाले अपने बचे हुए सामान को अक्सर कोल्ड स्टोरेज में भी रखवा देते हैं। एक बार का रखा हुआ खजूर कई-कई रमजान में बेचा जाता है।
विज्ञापन
पाम ऑयल मिलाकर बेचा जा रहा रिफाइंड तेल
नयागंज के व्यापारियों का कहना है कि कई जिलों से नकली खाद्य तेल गुप्त तरीके से सप्लाई किया जाता है। हाल की कार्रवाई में पाम ऑयल की मिलावट कर रिफाइंड के नाम पर तेल बेचने के मामले सामने आए हैं। अधिकारियों ने त्योहारों तक अभियान जारी रखने और उपभोक्ताओं से खरीदारी में सतर्कता बरतने की अपील की है।