मध्यप्रेदश से बुंदलेखंड में घुसे पाकिस्तानी टिड्डियों के दलों ने बांदा के सात और महोबा जिले के पांच गांवों में बृहस्पतिवार को धावा बोलकर 100 बीघा सब्जी की फसल चट कर दी। बांदा में एक हफ्ते के अंदर टिड्डी दल ने दूसरी बार हमला किया है।
विज्ञापन
कई जगह ग्रामीणों ने थाली और शोरशराबा कर खेतों में टिड्डियों के दल को नहीं उतरने दिया, इसपर टिड्डियों ने पेड़ों पर अड्डा जमा लिया। वन विभाग की टीम ने रसायन और धुआं का छिड़काव कर हजारों टिड्डियों को मार दिया। बांदा के सात गांवों में बृहस्पतिवार की सुबह पाकिस्तान के टिड्डी दल ने धावा बोला।
दल के पहुंचने की सूचना पर पहुंचे गांव के किसानों और महिला-पुरुष और बच्चों ने थाली आदि पीटकर शोर मचाते हुए टिड्डी दल को भगाया। कई बागों के पेड़ों को भी भारी नुकसान हुआ। कोई सरकारी अधिकारी या कर्मचारी बचाव कार्यों में नहीं पहुंचा।
विज्ञापन
छह दिनों पूर्व जिले की पूर्वी सीमा से दाखिल हुए टिड्डी दल ने ओरन, वैदन पुरवा, हथौरा आदि गांवों में धावा बोला था। ग्रामीणों और फायर ब्रिगेड व कृषि विभाग ने दवा का छिड़काव कर टिड्डियों को मारा था।
अब बृहस्पतिवार की सुबह करीब 9 बजे जिले के दक्षिण सीमा पर मध्य प्रदेश से आए बड़े टिड्डी दल ने नरैनी क्षेत्र के सीमावर्ती गांवों करतल, बिल्हरका, महाराजपुर, मानपुर, पुकारी, रगौली, बाबूपुर गांवों में धावा बोला, जिससे किसानों में हड़कंप मच गया।
ग्रामीण और किसान खेतों पर आ गए और थाली आदि पीटकर शोर मचाया। इसके बावजूद टिड्डी दल ने नदी किनारे बोई गई सैकड़ों बीघा सब्जी की खेती को चट कर दिया। लगभग एक घंटे तक टिड्डी दल फसलें चौपट करता रहा।
बोड़ा पुरवा के पप्पू निषाद, राजू यादव, कल्लू अहिरवार, भोला सिंह आदि के खेतों को नुकसान पहुंचाया। महाराजपुर में पप्पू पटेल का सब्जी का खेत चट कर दिया। आसमान पर असंख्य संख्या में टिड्डी उड़ते रहे। किसानों ने शासन से मुआवजे की मांग की है।
उधर, महोबा में तीन दिनों से डेरा जमाए टिड्डी दल ने बृहस्पतिवार को भगारी, बछेछर कला, नगाराडांग, मगरौल, सलैया गांव में हमला कर दिया। टिड्डी दल के आने की सूचना पर पहुंचे ग्रामीणों ने थाली बजाकर और शोरशराबा कर खेतों में नहीं उतरने दिया, जिससे दल पेड़ों में बैठ गया।
वन विभाग की टीम ने धुआं करके और कृषि विभाग के अधिकारियों ने रासायनिक दवाओं का छिड़काव किया। पिछले तीन दिनों से टिड्डियां आसमान में मंडरा रही हैं। शाम होते ही खेतों तो कभी पेड़ों में बैठ जाती हैं, जिससे किसान की रातों की नींद हराम हो गई।
किसान खेतों की रखवाली को ढोल-नगाड़े और थाली के साथ डटे हैं। टिड्डियों के आने की सूचना पर उप निदेशक कृषि जीराम के नेतृत्व में विभाग की टीम मौके पर पहुंची। बताया कि दमकल विभाग की टीम बुलाकर रासायनिक दवाओं का छिड़काव कराया गया, जिससे हजारों टिड्डियां मौके पर मर गई, जबकि तमाम टिड्डियां भागने में सफल रहीं। कृषि विभाग के अधिकारी पिछले तीन दिनों से सक्रिय हैं। अब टिड्डी दल नौगांव की ओर निकल गया।
राजस्व परिषद ने मांगी नुकसान की रिपोर्ट
बांदा में टिड्डी दल द्वारा फसलों को पहुंचाया गया नुकसान यहां दैवी आपदा श्रेणी में शामिल नहीं है। अलबत्ता शासन प्रभावित किसानों को राहत दे सकता है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद ने पत्र जारी कर डीएम से टिड्डी दलों द्वारा फसलों को पहुंचाए गए नुकसान का ब्योरा मांगा है। प्रशासन ब्योरा तैयार करवा रहा है।
गौरतलब है कि जिले में टिड्डी दल ने 12 जून को पहली बार धावा बोला था। ओरन क्षेत्र के बैदन पुरवा सहित हथौरा, कालिंजर, गोड़ीबाबा आदि गांवों में टिड्डी दल का प्रकोप हुआ था। हालांकि, ज्यादातर खेत खाली होने से फसलों को नुकसान नहीं पहुंचा। अलबत्ता बड़े पेड़ों को ही टिड्डी दल ने निवाला बनाया। अब बृहस्पतिवार (18 जून) को नरैनी क्षेत्र में टिड्डी दल ने सब्जी की खेती को काफी नुकसान पहुंचाया है।
चित्रकूट के बरौंधा के जंगल में पहुुंचा टिड्डी दल
राजस्थान से तीन अलग-अलग क्षेत्रों में नए टिड्डी दल के जिले की सीमा से सटे मध्यप्रदेश के सतना, पन्ना व छतरपुर क्षेत्र में मंडरा रहे हैं। एक दल तो बांदा के रास्ते चित्रकूट के भरतकूप क्षेत्र के बरौंधा में पहुंच गया है। अबकी दल में पिछली बार की अपेक्षा टिड्डियों की संख्या अधिक है। बरौंधा क्षेत्र में पहुंचे टिड्डी दल की संख्या करीब एक करोड़ के आसपास बताई जा रही है।
इसको लेकर कृषि विभाग अलर्ट है। एक दल एमपी के छतरपुर जिले के सिंगरापुर क्षेत्र में, जबकि एक दल शिवपुरी इलाके में है। जिले की सीमा के अंतर्गत सबसे नजदीक टिड्डी दल भरतकूप क्षेत्र के मप्र के जंगल बरौंधा में है। कृषि रक्षा अधिकारी धर्मेंद्र अवस्थी ने बताया कि टिड्डी दल के आने पर उन्हें मारने और भगाने की तैयारी सीमा क्षेत्र से सटे गांव के किसानों के साथ मिलकर की गई है।