आयकर विभाग के छापे के बाद पशु आहार बनाने वाली कंपनी की चल रही जांच में माली, सफाई कर्मी और रसोइयों के नाम 19 करोड़ रुपये की संपत्ति और शेयर के पेपर मिले हैं। इससे पहले कंपनी का एक निदेशक टैक्सी चालक मिला था। इसके अलग-अलग खातों के जरिये 50 करोड़ से अधिक का लेन देन किया गया था।
कंपनी ने इस रुपये को चिटफंड कंपनी में लगाया और फिर लोन के जरिये वापस ले लिया। सूत्रों के अनुसार कंपनी ने अपने काले धन को खपाने के लिए मुखौटा कंपनियों का सहारा लिया। इन कंपनियों के निदेशकों में घर या कंपनी में काम करने वाले माली, रसोइये और सफाईकर्मी हैं। इन कंपनियों का मुख्यालय दिल्ली या कोलकाता जैसे शहरों में दिखाया गया है।
टीम को तीन नौकरों के नाम 11 करोड़ रुपये की संपत्ति होने के दस्तावेज मिले हैं। आठ करोड़ का निवेश शेयर में दिखाया गया। इनके खातों में आए रुपयों का इस्तेमाल पशु आहार बनाने वाली कंपनी के लोगों के आवास निर्माण में किया गया। करीब 30 संपत्तियां होने के दस्तावेज आयकर विभाग को मिले हैं। वहीं 13 मुखौटा कंपनियों की जानकारी हाथ लगी है। गगगगश्