बुंदेलखंड में चौथे चरण के चुनाव मतदान की ‘घड़ी’ आ गई। 23 फरवरी (गुरुवार) को वोट पड़ेंगे। उधर, प्रचार थमने के बाद प्रत्याशी मतदाताओं को रिझाने के लिए तरह-तरह के पैंतरे अपनाएं हैं। 500 से 1000 वोटबैंक के ‘मुखिया’ को साधने की कोशिशें दम से की गईं। खासकर जातिगत वोटबैंक में सेंधमारी के प्रयास ज्यादा हुए। शराब की घूंट के साथ दावतों का दौर भी दिन-रात चला।
आचार संहिता लागू होने के 51वें दिन यानी गुरुवार को प्रत्याशियों की किस्मत ईवीएम में कैद हो जाएंगी। प्रचार थमने के बाद सभी प्रत्याशियों में घर-घर दौड़ की होड़ है। भाजपा, बसपा और सपा-कांग्रेस एक-दूसरे के वोट बैंक में सेंध लगाने की सियासत रच रहे हैं। भाजपा भीम एप के जरिए दलितों को रिझा रहे हैं तो बसपा अपना परंपरागत वोटबैंक बताकर साधने की कोशिश में हैं। सपा-कांग्रेस यादव और मुस्लिमों को पाले में लाने की कोशिश में है।
इसके अलावा भी हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। प्रमुख दलों के प्रत्याशी प्रधान, ब्लाक प्रमुख, बीडीसी और डीडीसी के जरिए भी वोटबैंक तक पहुंचने का रास्ता अपना रहे हैं। साम, दाम, दंड, भेद की सियासत भी गर्माई है। प्रशासन की घेरेबंदी प्रत्याशियों के सिस्टम के आगे बौनी साबित हुई। चुनाव प्रचार थमने के बाद गुपचुप ढंग से पार्टियां का सिलसिला चला। शराब के जाम टकराए तो दावतों के दौर चलते रहे।