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यूपी बार काउंसिल चुनाव : 154 बूथों पर 8511 वकीलों ने किया मतदान

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कानपुर। यूपी बार काउंसिल चुनाव में शहर में कुल 8511 मतदाताओं ने मतदान किया। बुधवार शाम पांच बजे दो दिन तक चली मतदान प्रक्रिया समाप्त हो गई। न्यायिक अधिकारियों व कर्मचारियों की देखरेख में चुनाव प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। पुलिस और विशेष सुरक्षा बल के जवानों की निगरानी में मतपेटियों को सील कर स्ट्रांग रूम में रखा गया है।
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प्रदेश के कुल 333 प्रत्याशियों में से 26 कानपुर से हैं। शहर में 11,908 मतदाताओं के मतदान के लिए 154 बूथ बनाए गए थे लेकिन 8511 ही वोट देने पहुंचे। न्यायालय भवन के भूतल पर स्थित मतदान केंद्र पर दिनभर सामान्य गति से मतदान चला। मंगलवार के मुकाबले बुधवार को 616 मत अधिक पड़े। मंगलवार को 3948 मत पड़े थे जबकि बुधवार को 4564 मत डाले गए। कचहरी स्थित शताब्दी द्वार से न्यायालय भवन तक लगाई गई बैरिकेडिंग से मतदाताओं को प्रवेश दिया गया और मतदान के बाद उन्हें हनुमान मंदिर की तरफ बने द्वार से निकाला गया।
सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस (सीओपी) कार्ड की जांच के बाद ही मतदान स्थल में प्रवेश और मतपत्र दिए गए। सीओपी कार्ड की जांच के लिए तीन काउंटर बनाए गए थे। एक काउंटर पर वर्ष 1962 से 2007, दूसरे पर 2008 से 2018 और तीसरे पर 2019 से 2025 में पंजीकरण कराने वाले मतदाताओं के सीओपी कार्ड की जांच की गई। सुबह 10 बजे से शुरू हुई मतदान की प्रक्रिया शाम पांच बजे तक चली। कई थानों के फोर्स के अलावा न्यायालय की सुरक्षा में तैनात विशेष सुरक्षा बल के जवान भी चुनावी ड्यूटी में लगाए गए थे। आपात स्थिति से निपटने के लिए फायर ब्रिगेड की गाड़ी भी तैनात थी। न्यायालयों में एकमोडेशन होने के कारण मुकदमों में विपरीत आदेश पारित नहीं किए गए। लखनऊ में मंगलवार को हुए बवाल और चुनाव निरस्त किए जाने की सूचना से बुधवार को पुलिसकर्मी, न्यायिक अधिकारी व एलआईयू ने विशेष सतर्कता बरती।
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चुनाव में शहर के ही नहीं बल्कि अन्य जिलों के प्रत्याशी भी वोट की जुगाड़ लगाते नजर आए। कचहरी के आसपास की सड़कों पर प्रत्याशियों ने टेंट लगाकर कब्जा जमा रखा था। पुलिस ऑफिस से लेकर चेतना चौराहे तक दोनों ओर सड़क पर टेंट लगे रहे। प्रत्याशी और समर्थक तरह-तरह से मतदाताओं को लुभाकर वोट मांगते रहे। कचहरी के अंदर व आसपास की दीवारें होडिंग, बैनर व पोस्टर से पटी रहीं। सड़कों पर पंफलेट व प्रचार सामग्री बिखरी दिखी। कचहरी के आसपास के रास्तों को बंद कर दिए जाने से दिनभर जाम की स्थिति बनी रही। वाहन रेंगते रहे और स्कूली वाहनों व एंबुलेंस को निकालने के लिए पुलिसकर्मी दिनभर पसीना बहाते रहे।



पूरा चुनाव न्यायिक अधिकारियों व कर्मचारियों की निगरानी में हुआ। न्यायिक कर्मचारी ही मतदानकर्मी बनाए गए हैं। किसी भी आरोप-प्रत्यारोप या धांधलेबाजी से बचने के लिए किसी भी अधिवक्ता को चुनाव ड्यूटी में नहीं लगाया गया। शासकीय अधिवक्ताओं को भी चुनावी प्रक्रिया से दूर रखा गया है। अपर जिला जज 24 अंशुमान पटनायक को नोडल अधिकारी बनाया गया है। जिला जज अनमोल पाल व पुलिस कमिश्रर रघुबीर लाल ने भी मतदान स्थल का निरीक्षण कर जरूरी दिशा-निर्देश दिए।
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