उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) का प्रधान महाप्रबंधक अरुण मिश्रा भ्रष्टाचार के आरोप में पहली बार वर्ष 1988 में निलंबित हुआ। इसके बाद अभी तक छह बार निलंबित हो चुका है। बर्खास्तगी का आदेश हुआ तो न्यायालय से स्टे ले आया। इस पर वर्ष 2007 में गाजियाबाद स्थित ट्रोनिका सिटी में 400 से ज्यादा औद्योगिक प्लाट बेचने में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे।
सके बाद लखनऊ के अमौसी औद्योगिक क्षेत्र में एक्जिबिशन सेंटर की जगह पर पांच मजिला इमारत बनवाने में गलत तरीके से ठेकेदार और सलाहकार चुनकर करीब 27 करोड़ रुपये का भुगतान किया। महंगे प्लाटों को सस्ते दर पर बेच कर सरकारी राजस्व को 152 करोड़ रुपये से अधिक की चपत लगाई। अरुण मिश्रा पर लगे आरोपों की लंबी फेहरिस्त है।
नौकरी केदो साल बाद से ही इसके कारनामे उजागर होने लगे। वर्ष 2007 में कैग की एक जांच रिपोर्ट में ट्रोनिका सिटी में प्लाट आवंटन को लेकर अरुण मिश्रा का बड़ा खेल सामने आया। यहां 96,600 वर्ग मीटर ग्रुप हाउसिंग और 76,640 वर्ग मीटर कॉमर्शियल के प्लाट आवंटित हुए थे। ग्रुप हाउसिंग के प्लाटों का मूल्य 12 से 13 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर के बीच रखा गया था।