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UP: मंत्री की भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम पर अखिलेश ने कसा तंज, पुलिस को बताया भाजपा का मौसेरा भाई

Tue, 18 Aug 2026 11:05 PM IST
Shikha Pandey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कन्नौज

सार

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट कर पुलिस को भाजपा का मौसेरा भाई बताया। पूर्व सांसद सुब्रत पाठक ने भी समाज कल्याण मंत्री के अभियान पर सवाल उठाए।
 
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अखिलेश यादव - फोटो : samajwadi party YT
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विस्तार
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समाज कल्याण राज्य मंत्री असीम अरुण की भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम को लेकर सवाल खड़े होने शुरू हो गए हैं समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं कन्नौज के सांसद अखिलेश यादव ने जहां सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट कर तंज कसा है। तो वहीं पूर्व सांसद सुब्रत पाठक ने भी कई सवाल खड़े किए हैं।
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मंगलवार को शहर के रोमा स्मारक मुक्त काशी मंच पर समाज कल्याण राज्य मंत्री असीम अरुण ने पुलिस के आला अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों के साथ बैठक की, जिसमें उन्होंने भ्रष्टाचार को लेकर सख्त हिदायत दी। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रामेंद्र त्रिवेदी ने सवाल उठाया कि भाजपा सरकार में चौकी से लेकर थाने तक बिके हुए हैं और लोगों को हर जगह सुविधा शुल्क देना पड़ रहा है। उनका यह वीडियो समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं कन्नौज से सांसद अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया और उसे पर तंज करते हुए लिखा उत्तर प्रदेश की पुलिस और भाजपाई, वर्षों मिलकर काटी मलाई, अब जब आई उनकी विदाई, कर रहे हिसाब यह मौसेरे भाई। थोड़ी ही देर में यह पोस्ट सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो गई और लोगों ने तरह-तरह के कमेंट शुरू कर दिए।
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पूर्व सांसद ने भी खोला मोर्चा
मंत्री की इस भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम पर पूर्व सांसद सुब्रत पाठक ने भी सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस या किसी विभाग में भ्रष्टाचार तब तक खत्म नहीं होगा, जब तक इसके खिलाफ सामूहिक रूप से आंदोलन नहीं होगा। मंत्री असीम अरुण आज यह मुहिम चला रहे हैं, जो अच्छी बात है लेकिन जब वह सांसद थे, तब उनके खिलाफ बिना जांच के तत्कालीन एसपी कुंवर अनुपम सिंह ने फर्जी मुकदमा लिख दिया था, जब उनसे पुलिस कर्मियों को पीटने वाली घटना को लेकर सीसीटीवी फुटेज देखने को कहा गया तो वह सामने नहीं आए।इसके बाद पुलिस वालों ने शरीर पर चाबियां रगड़कर फर्जी मुकदमा दर्ज करवा दिया। उस समय मंत्री को भ्रष्टाचार नहीं दिखाई दिया। आज भी वह एसपी चार्ज पर है। भ्रष्टाचार केवल धन उगाही ही नहीं होता है, बल्कि इस तरह से भी होता है। इस पर मंत्री को आत्म मंथन करने की जरूरत है।
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