31 मार्च तक अनसिक्योर्ड लोन की वापसी के आदेश को लेकर सांसत पड़ीं प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों को मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स के ताजा सर्कुलर से बड़ी राहत मिली है। इसमें इस प्रकार के लोन की राशि की अदायगी से मुक्ति दे दी गई है।
अंतिम तिथि के ठीक एक दिन पहले हुए इस फैसले से अकेले कानपुर की लगभग सात हजार प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों में खुशी की लहर दौड़ गई है। प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों में उनके निदेशक, निदेशक के रिश्तेदार और शेयर होल्डर की ओर से जो रकम लगाई जाती थी, उसे अनसिक्योर्ड लोन का दर्जा दिया जाता है।
पुराने कंपनीज एक्ट-1956 में इस राशि को स्वीकार किए जाने की अनुमति दी गई थी। मगर नए कंपनीज एक्ट-2013 में निदेशक को छोड़कर अन्य किसी की ओर से कंपनी को दिए गए अनसिक्योर्ड लोन को अस्वीकार कर दिया गया था।
इसके अलावा यह भी निर्देश दिए गए थे कि जिन भी कंपनियों में इस प्रकार का लोन जमा है उसे 31 मार्च 2015 तक हर हाल में संबंधित लोगों को वापस कर दिया जाए। यदि ऐसा नहीं किया गया तो कंपनी पर एक करोड़ से लेकर दस करोड़ तक की पेनाल्टी लगाने के निर्देश दिए गए थे।
यही नहीं लोन वापसी न होने की दशा में कंपनी के निदेशकों को सात साल तक की सजा और 25 लाख से दो करोड़ तक की पेनाल्टी के भी प्रावधान थे। इस आदेश से कंपनियों में खलबली मची हुई थी। सूत्रों के मुताबिक ऐसी कोई प्राइवेट लिमिटेड कंपनी नहीं होगी, जिसमें अनसिक्योर्ड लोन डिपॉजिट न हो।
लगभग सभी कंपनियों में यह पैसा विभिन्न व्यावसायिक गतिविधियों में खर्च करने और पूंजी की जरूरतों में प्रयोग करने के लिए करते हैं। अचानक इस प्रकार भारी रकम की निकासी करने से कंपनियों का दिवाला पिट जाने की नौबत आन पड़ी थी।
इधर 30 मार्च को असिस्टेंट डायरेक्टर (पॉलिसी) केएमएस नारायण ने एक सर्कुलर (5/2015) जारी करके एक अप्रैल 2014 के पूर्व के सभी अनसिक्योर्ड लोन की स्वीकृति दे दी है। इस सर्कुलर के साथ ही कंपनियों को लोन वापसी के झंझट से मुक्ति मिल गई है। इस आदेश का फायदा देश भर की प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों को मिलेगा।
प्रत्येक कंपनी में लाखों-करोड़ों रुपए का अनसिक्योर्ड लोन डिपॉजिट होता है। अचानक से पैसा वापसी को लेकर कंपनियों में हड़कंप मचा हुआ था। अंतिम तिथि के ठीक एक दिन पहले सर्कुलर आया है, जिसमें एक अप्रैल 2014 के पूर्व के अनसिक्योर्ड लोन को स्वीकृति दे दी गई है। इससे कंपनियों को काफी राहत मिली है।
सीएस सुरेंद्र साहू, कंपनी मामलों के सलाहकार